देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 96 विद्यार्थियों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया
एनएचआरसी, भारत के महासचिव, श्री भरत लाल ने समापन सत्र में कहा, युवाओं के लिए आयोग की इंटर्नशिप पहल का उद्देश्य उनके करियर के लक्ष्यों और व्यक्तिगत मूल्यों को आकार देना है
उन्होंने इंटर्न से कहा कि वे जिज्ञासु बने रहे, प्रश्न पूछते रहे और समाज में रचनात्मक योगदान देने के लिए अन्य व्यक्तियों के विचार सुने
PIB Delhi
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत के चार सप्ताह के वैयक्तिक रूप से (इन-पर्सन) ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप (प्रशिक्षुता) कार्यक्रम (एसआईपी) का आज नई दिल्ली में समापन हो गया। देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से 1,768 आवेदकों में से चयनित 96 छात्रों ने कार्यक्रम में भाग लिया। एनएचआरसी, भारत के महासचिव, श्री भरत लाल ने समापन सत्र में अपने संबोधन में कहा कि विभिन्न शैक्षणिक विषयों, क्षेत्रों और पृष्ठभूमि के प्रशिक्षु (इंटर्न) भारत की समृद्ध विविधता को दर्शाते हैं। इस अवसर पर एनएचआरसी के संयुक्त सचिव, श्री समीर कुमार और श्रीमती सैडिंगपुई छक्छुआक, प्रसेंटिंग ऑफिसर, श्रीमती नीरू कंबोज, डीआईजी, श्री गौरव गर्ग, निदेशक, श्री इरशाद आलम और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

श्री लाल इंटर्न्स को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे इंटर्नशिप के पिछले चार सप्ताह में जो सीखा है केवल उसके बारे में ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी विचार करें यह अनुभव उनके जीवन की दिशा को कैसे आकार देगा। उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप की असल मूल्य उसके प्रमाणपत्र में नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली स्पष्टता, उद्देश्य और चरित्र के विकास में है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव का ज़िक्र करते हुए, महासचिव ने कहा कि औसत दर्जे के काम की जगह तेज़ी से टेक्नोलॉजी ले लेगी। इसलिए, इंटर्न्स को अपने चुने हुए क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिछली पीढ़ियों की तुलना में आज के युवाओं के पास संसाधनों तक बेहतर पहुंच है और इसलिए, उनकी उत्कृष्टता हासिल करने और समाज में योगदान करने की अधिक जिम्मेदारी है।
श्री लाल ने उभरती हुई वैश्विक चुनौतियों पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भविष्य की आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर मज़दूरों के अधिकारों, रहन-सहन की स्थितियों, पर्यावरण, जलवायु और स्थिरता का असर बढ़ता जाएगा। भाईचारे के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का असली अर्थ समझने के लिए इंसान को अपना कुछ समय, ऊर्जा और संसाधन का उपयोग दूसरों के लिए भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा करना सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने इंटर्न से कहा कि वे जिज्ञासु बने रहें, प्रश्न पूछते रहें और दूसरों के विचार सुनें ताकि वे समाज में रचनात्मक योगदान दे सकें।

इंटर्नशिप कार्यक्रम की जानकारी देते हुए, एनएचआरसी, भारत की संयुक्त सचिव, श्रीमती सैडिंगपुई छक्छुआक ने कहा कि इस कार्यक्रम से इंटर्न को एनएचआरसी के अध्यक्ष, सदस्यों, महासचिव, विशेष मॉनिटर और विशेष रैपोर्टियर, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के दौरान मानवाधिकारों के बहुआयामी आयामों का पता लगाने के लिए एक बेहतरीन मंच उपलब्ध हुआ है। फील्ड विजिट और पुस्तक समीक्षा, शोध परियोजना प्रस्तुतियों और भाषण प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों ने मानवाधिकारों और मूल्यों के बारे में उनके ज्ञान और समझ को और बढ़ाया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम ने आलोचनात्मक सोच, सहयोग और मानवाधिकारों की हिमायत करने की अधिक गहन समझ को प्रोत्साहित किया, जिससे इंटर्न न्याय, गरिमा और समानता के पक्षधर बनने के लिए प्रेरित हुए।
