नई दिल्ली में गढ़वाली फिल्म “कंडाली” का पोस्टर-ट्रेलर लॉन्च, महिला सशक्तिकरण की मजबूत कहानी
नई दिल्ली में गढ़वाली सिनेमा को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए निर्माणाधीन फिल्म “कंडाली” का पोस्टर और ट्रेलर भव्य समारोह में जारी किया गया। यह कार्यक्रम न केवल फिल्म के प्रचार-प्रसार का मंच बना, बल्कि गढ़वाली सिनेमा की संभावनाओं और सामाजिक संदेशों को भी सामने लाने का अवसर साबित हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आलोक जोशी उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका अद्वैता काला और मंजीत नेगी शामिल रहे।
फिल्म के निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत तथा निर्माता राजेश भंडारी और वीरेंद्र पटवाल भी मंच पर मौजूद रहे। सभी ने मिलकर फिल्म के पोस्टर का अनावरण किया और ट्रेलर लॉन्च किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आलोक जोशी ने फिल्म की टीम को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि “कंडाली” महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश देगी और दर्शकों के बीच बड़ी सफलता हासिल करेगी। वहीं निर्देशक शिव नारायण सिंह रावत ने बताया कि यह फिल्म एक ऐसी साहसी लड़की की कहानी है, जो एक गरीब गांव से उठकर आईपीएस अधिकारी बनती है और भ्रष्टाचार व अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ती है।
उन्होंने अपने लंबे फिल्मी अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि वे दशकों से मुंबई और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में सक्रिय हैं। इससे पहले वे गढ़वाली फिल्मों जैसे “जगवाल” में अभिनय कर चुके हैं और “बाउल्या काका” तथा “मार्चा” जैसी फिल्मों का निर्देशन भी कर चुके हैं।
विशिष्ट अतिथि अद्वैता काला ने गढ़वाली फिल्मों के निर्माण पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वह भविष्य में क्षेत्रीय सिनेमा के लिए भी लेखन करना चाहेंगी। वहीं निर्माता राजेश भंडारी ने इसे अपने जीवन का सपना बताया और कहा कि यह फिल्म उत्तराखंड की सैन्य परंपरा और महिला शक्ति से प्रेरित है।
समारोह के दौरान कई प्रमुख हस्तियों को सम्मानित भी किया गया, जिनमें पवन सुयाल, सुनील नेगी, सुशीला रावत, प्रमेंद्र रावत, संजय जोशी, अजय बिष्ट, संयोगिता ध्यानी, कुसुम बिष्ट और देव गुसाईं जैसे नाम शामिल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ और फिल्म के कलाकारों से भी दर्शकों को परिचित कराया गया।
कुल मिलाकर, “कंडाली” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि गढ़वाली समाज में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव का संदेश देने वाला एक सशक्त प्रयास बनकर उभर रही है।
