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इस नीति ने लैंडिंग पेज की व्यूअरशिप को मापन से अलग रखा; इसका उपयोग केवल एक मार्केटिंग टूल के रूप में ही सीमित है

नए प्रावधानों के तहत पारदर्शी कार्यप्रणाली का खुलासा अनिवार्य; डीपीडीपी के अनुरूप डेटा सुरक्षा अनिवार्य

रेटिंग नीति में दोहरी-ऑडिट प्रणाली अनिवार्य; बड़े नमूना आकर (सैंपल साइज) के जरिए डेटा की सटीकता बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार ने टीवी रेटिंग एजेंसियों के लिए नेट वर्थ के नियमों में ढील दी; पात्रता मानदंड 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये किया गया

PIB Delhi

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने आज ‘टीवी रेटिंग नीति 2026’ जारी की। इसमें भारत में टेलीविजन रेटिंग को विनियमित करने हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं। यह नीति टीवी रेटिंग सेवाएं प्रदान करने वाली एजेंसियों के पंजीकरण, संचालन, ऑडिट और निगरानी के लिए स्पष्ट मानक तय करती है, जिसका उद्देश्य दर्शकों के मापन में पारदर्शिता, स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

नीति की मुख्य विशेषताएं

  • प्रवेश संबंधी नियमों में ढील: टीवी रेटिंग एजेंसी के तौर पर पंजीकृत होने की इच्छुक कंपनी के लिए नेट वर्थ संबंधी जरूरत को मौजूदा 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • कड़े टकराव-रोधी (एंटी-कॉन्फ्लिक्ट) उपाय: निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु, इस नीति में यह प्रावधान है कि निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) में कम से कम 50 प्रतिशत स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए, जिनका प्रसारकों (ब्रॉडकास्टर्स)/विज्ञापनदाताओं/विज्ञापन एजेंसियों से कोई संबंध न हो। इसके अलावा, एजेंसियों को परामर्श कार्य (कंसल्टेंसी) की वैसी भूमिकाओं में शामिल होने से मना किया गया है, जिनसे हितों का टकराव पैदा हो।
  • बढ़ा हुआ नमूना आकार (सैंपल साइज) और प्रतिनिधि डेटा: डेटा की सटीकता को बेहतर बनाने हेतु, एजेंसियों को 18 महीनों (मौजूदा रेटिंग एजेंसी के लिए 6 महीने) के भीतर अपने कामकाज  का विस्तार करके 80,000 मीटर वाले घरों तक पहुंचना होगा, और अंततः 1,20,000 घरों तक पहुंचना होगा। मापन तकनीक-तटस्थ होना चाहिए, जो केबल, डीटीएच, ओटीटी और जुड़े हुए  टीवी से संबंधित डेटा इकट्ठा करे। डेटा मीटर वाले घरों की सभी टीवी देख जाने वाली स्क्रीन से इकट्ठा किया जाएगा।
  • पारदर्शिता एवं गोपनीयता: एजेंसियों को अपनी विस्तृत कार्यप्रणाली और अनाम डेटा अपनी वेबसाइटों पर प्रकाशित करना अनिवार्य है। इसके अलावा, दर्शकों की गोपनीयता की सुरक्षा हेतु सभी गतिविधियों को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 का कड़ाई से पालन करना होगा।
  • जवाबदेही एवं ऑडिट: अब एक दोहरी ऑडिट प्रणाली अनिवार्य है, जिसमें हर तीन महीने में आंतरिक ऑडिट और हर वर्ष स्वतंत्र बाहरी ऑडिट शामिल हैं। मंत्रालय समय-समय पर फील्ड निरीक्षण के लिए एक ऑडिट और निगरानी टीम भी बनाएगा।
  • शिकायत निवारण: एजेंसियों को शिकायतों को 10 दिनों के भीतर निपटारा करने हेतु एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा और बड़े विवादों के लिए एक अपीलीय प्राधिकरण स्थापित करना होगा।
  • लैंडिंग पेज से जुड़ी छूट और जानकारी देने की शर्तें: लैंडिंग पेज से मिलने वाली किसी भी व्यूअरशिप (देखने वालों की संख्या) को व्यूअरशिप के मापन में नहीं गिना जाएगा। हालांकि, लैंडिंग पेज का उपयोग केवल एक मार्केटिंग टूल के रूप में किया जा सकता है। रेटिंग एजेंसी को प्रसारक (ब्रॉडकास्टर)यह जानकारी देंगे कि उनका चैनल लैंडिंग पेज पर उपलब्ध है या नहीं।
  • नियमों का पालन और दंड: नियमों का पालन न करने पर अलग-अलग तरह के दंड दिए जायेंगे, जिनमें रेटिंग का कुछ समय के लिए निलंबन से लेकर बार-बार उल्लंघन करने पर पंजीकरण रद्द करना शामिल है।
  • व्यूअरशिप डेटा प्रकाशित करने की अनुमति वाले प्लेटफॉर्म: टीवी वितरण प्लेटफॉर्म या ओटीटी प्लेटफॉर्म, अपने प्लेटफॉर्म पर चल रहे प्रसारकों (ब्रॉडकास्टर)/चैनलों के समय-समय पर आने वाले व्यूअरशिप डेटा को अपनी वेबसाइटों पर प्रकाशित कर सकते हैं; इसके लिए उन्हें इन दिशानिर्देशों के तहत पंजीकरण या अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

इन उपायों के जरिए, भारत सरकार एक निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी और सुशासित प्रसारण संबंधी  वातावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराती है और हितधारकों एवं जनहित की रक्षा करती है।

टीवी रेटिंग नीति 2026, भारत में टीवी रेटिंग एजेंसियों से संबंधित 16 जनवरी 2014 की मौजूदा दिशा-निर्देशों की जगह लेती है। टीवी रेटिंग नीति 2026 मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।


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By udaen

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