Spread the love

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया

PIB Delhi

बच्चों को यौन शोषण और यौन अपराधों से बचाने के लिए भारत सरकार द्वारा बाल यौन संरक्षण अधिनियम, 2012 लागू किया गया था। अधिनियम में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है कि 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति बच्चा है। पॉक्सो अधिनियम अपराध की गंभीरता के अनुसार आनुपातिक दंड का प्रावधान करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल यौन शोषण से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा तैयार किया है, जिसमें स्कूलों से रिपोर्ट किए गए मामले भी शामिल हैं। पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत स्कूल अधिकारियों सहित सभी व्यक्तियों के लिए ऐसे अपराधों की अनिवार्य रिपोर्टिंग अनिवार्य है और समयबद्ध जांच एवं बाल-हितैषी प्रक्रियाओं का प्रावधान है।

इसके अलावा, किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 और मिशन वात्सल्य के ज़रिए कार्यान्वित एकीकृत बाल संरक्षण ढांचे के तहत, बाल कल्याण समितियां (सीडब्ल्यूसी), जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) और विशेष किशोर पुलिस इकाइयां (एसजेपीयू) जैसी व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, ताकि त्वरित रिपोर्टिंग, मामलों को आगे बढ़ाना और बाल संरक्षण एवं कानून प्रवर्तन अधिकारियों से संपर्क सुनिश्चित किया जा सके।

बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित आंकड़े राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) के पोर्टल https://ncrb.gov.in पर देखे जा सकते हैं। यह मंत्रालय इन मामलों की रिपोर्टिंग, आगे की कार्रवाई और संबंधित आंकड़ों का केंद्रीय रूप से रखरखाव नहीं करता है। हालांकि, मंत्रालय उत्तर प्रदेश सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित रूप से सलाह जारी करता है, ताकि पॉक्सो अधिनियम का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके, जिसमें अनिवार्य रिपोर्टिंग प्रावधान, एफआईआर का समय पर पंजीकरण और मामलों को उचित बाल संरक्षण संस्थानों को तत्काल भेजना शामिल है।

इसके अलावा, संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने के लिए विद्यालयों के अधिकारियों, पुलिस कर्मियों, विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (एसजेपीयू), बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) और अन्य हितधारकों के लिए समय-समय पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम और संवेदीकरण पहलें भी आयोजित की जाती हैं। अधिनियम के तहत बाल-हितैषी प्रक्रियाओं और वैधानिक दायित्वों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संबंधित एजेंसियों के सहयोग से नियमित रूप से मार्गदर्शन, प्रशिक्षण मॉड्यूल और सूचना एवं संचार शिक्षा सामग्री भी तैयार की जाती है। इन पहलों का मकसद हितधारकों के बीच समन्वय में सुधार करना और मामलों को निपटाने में त्वरित, संवेदनशील और बाल-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) के अधीन एक वैधानिक और स्वायत्त निकाय है। आयोग को बाल अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों, जिनमें बाल यौन शोषण के मामले भी शामिल हैं, की जांच और छानबीन करने तथा बच्चों के संरक्षण और कल्याण से संबंधित कानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन की निगरानी करने का दायित्व सौंपा गया है। आयोग ने 15 फरवरी 2019 को संबंधित मंत्रालयों, विभागों, संस्थानों और अन्य हितधारकों को विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा संबंधी नियमावली वितरित की। इसके बाद वर्ष 2021 में आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाए जाने हेतु “विद्यालय सुरक्षा” संबंधी व्यापक दिशानिर्देश जारी किए। इसके अलावा, आयोग अपनी ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली (ई-बॉक्स/पॉक्सो ई-बॉक्स) के माध्यम से मामलों की निगरानी करता है, अनुपालन न होने के मामलों में जांच और तथ्य-खोज करता है, अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगता है और जवाबदेही और बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए विद्यालय अधिकारियों के लिए जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करता है।

शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में निहित प्रावधानों के अनुरूप, सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए विद्यालय सुरक्षा एवं संरक्षा संबंधी दिशानिर्देश विकसित किए हैं। ये दिशानिर्देश परामर्शात्मक प्रकृति के हैं और 01.10.2021 को डीओएसईएल के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/स्वायत्त निकायों तथा हितधारक मंत्रालयों को प्रेषित किए गए हैं। दिशानिर्देशों में आगे कहा गया है कि किसी भी अप्रिय घटना, जैसे शारीरिक या यौन हिंसा, बदमाशी, चोट लगना आदि की स्थिति में, विद्यालय प्रबंधन को संबंधित अधिकारियों को मामले की सूचना देनी चाहिए और तत्काल ज़रुरी कार्रवाई और सुधारात्मक उपाय करने चाहिए, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने बाल यौन शोषण के मामलों में जांच में तेजी लाने के लिए कई उपाय किए हैं। इन उपायों में बाल यौन शोषण के मामलों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग के लिए व्यवस्था, संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) तक रिपोर्ट की गई घटनाओं की पहुंच, साइबर फोरेंसिक सुविधाओं में सुधार, कानून प्रवर्तन अधिकारियों/न्यायाधीशों/लोक अभियोजकों का प्रशिक्षण, जागरूकता का प्रसार आदि शामिल हैं। सरकार ने विधि एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) स्थापित करने की योजना का भी क्रियान्वयन किया है। 30.11.2025 तक, 29 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 774 एफटीएससी कार्यरत हैं, जिनमें 398 विशेष पॉक्सो (ई- पॉक्सो) न्यायालय शामिल हैं। योजना की शुरुआत से अब तक इन न्यायालयों ने 3,61,055 मामलों का निपटारा किया है।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *