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जेसीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनुराग सक्सेना ने देहदान का संकल्प ले पेश की मानवता की मिसाल

जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनुराग सक्सेना ने अंगदान और देहदान व्यवस्था से प्रेरित होकर सहर्ष देहदान और अंगदान हेतु स्वयं का अभियान करवा मानवता की मिसाल पेश की है बकौल डॉ सक्सेना मेरा मानना है कि इस संसार में सब कुछ नश्वर है सबकुछ एक दिन नष्ट होगा। ऐसे में यह शरीर भी एक दिन नष्ट होगा और जब आप नष्ट होंगे तो आप पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होंगे ऐसे में आपके साथ क्या होगा यह आप नहीं जानते। वर्तमान पीढी मे आपके दिए संस्कार उस समय क्या निर्णय लेंगे यह भी आपको जानकारी नहीं है। आज के परिदृश्य में तमाम ऐसी घटनाएं सामने आई है कि कोई अंतिम संस्कार तक करने नहीं आया। बच्चो के अच्छे भविष्य के लिए वह हमसे दूर है उस समय आ पाये या किसी परिस्थति के कारण न आ पायें यह समय पर निर्भर है। ऐसे में क्यों न इस देह के अंग दान कर दिया जाये। ऐसा करने से किसी न किसी को इस बेकार शरीर से कोई न कोई लाभअवश्य मिल जायेगा। जैसे जब घर मे रखे बर्तन जब पुराने और बेकार हो जाते है तो उस समय उन्हे फेंकने की नौबत आ जाती है क्योकि खराब चीज कोई रखना नहीं चाहता तो उसे फेंकने से बेहतर है उसके बदले में भले ही एक छोटी चीज ले ली जाये वह अवश्य किसी न किसी के काम आ जाती है। डॉ सक्सेना के इस संकल्प से निःसंदेह समाज में
एक पॉजिटिव संदेश जाएगा।

डॉ अनुराग सक्सेना ने बताया कि जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के हमारे राजस्थान प्रदेश के संयोजक डॉ राकेश वशिष्ठ भी पूर्व में 2002 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में देहदान और अंगदान का पंजीयन करवा चुके हैं साथ ही अभी तक स्वयं 104 बार रक्तदान कर चुके हैं और अभी तक लगभग 534 व्यक्तियों को मोटिवेट करके देहदान और अंगदान का पंजीयन करवा चुके हैं और लगातार आम जनता को रक्तदान अंगदान और देहदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं और युवाओं के प्रेरणा श्रोत बने हुए हैं।

डॉ अनुराग सक्सेना ने बताया के मनुष्य जब जन्म लेता है तब उसे सृष्टि के सृजनकर्ता और प्रकृति और समाज से जीवन पर्यंत बहुत कुछ मिलता है अतः जाते जाते जीवन में कुछ ऐसा कर जाओ कि एक मिसाल बन जाए और हमारी मृत्यु के बाद भी हम किसी न किसी रूप में इस संसार में जीवित रहें और वह हमारे सद्‌कर्म और रक्तदान देहदान और अंगदान हैं जिनके माध्यम से हम अपनी मृत्यु के उपरांत भी किसी व्यक्ति को जीवनदान देते हुए उसके शरीर में किसी न किसी रूप में जीवित रहते हैं अतः समाज में कैंप आयोजित कर लोगों को जागरूक कर अधिक से अधिक रक्तदान देहदान और अंगदान की जागरूकता फैलाने के लिए कटिबद्ध होकर कार्य करने की आवश्यकता है। डॉ सक्सेना के इस कदम की इष्ट मित्रों समाजसेवकों ने भूरी भूरी प्रशंसा की और बधाई दी।


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By udaen

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