दिल्ली जंतर-मंतर: 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद खटीमा की बेटी नेहा बोरा ने समाप्त किया अनशन
नई दिल्ली | प्रतिनिधि
दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा घोटालों में जवाबदेही और विभिन्न छात्र मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में उत्तराखंड के खटीमा की बेटी नेहा बोरा ने 23 दिन की अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संदेश और विपक्षी नेताओं तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की अपील के बाद लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त हुआ है, आंदोलन नहीं।
नेहा बोरा, जो ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ी शोध छात्रा हैं, ने साथी आंदोलनकारियों मनीष कुमार और अमीन अमितोज के साथ 23 दिनों तक केवल पानी के सहारे अनशन जारी रखा। चिकित्सकों के अनुसार लंबे उपवास के कारण तीनों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा और उनके शरीर के वजन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
इस आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर रहे। उन्होंने 26 दिन बाद केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत के पश्चात अपना अनशन समाप्त किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके स्वास्थ्य की कामना करते हुए परीक्षा-पत्र लीक के विरुद्ध कठोर कानून लाने की बात कही।
हालांकि आंदोलन से जुड़े छात्र संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासनों से उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित होने तक आंदोलन विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से जारी रहेगा।
उत्तराखंड के खटीमा की नेहा बोरा की 23 दिन की भूख हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उत्तराखंड के सामाजिक और छात्र संगठनों ने उनकी दृढ़ता और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष की सराहना की है।
