Spread the love

📍 स्थान: उत्तरांचल प्रेस क्लब, देहरादून
📅 तिथि: 16 जून 2025

देहरादून में आज ‘बस्ती बचाओ आंदोलन’ द्वारा आयोजित जनसेमिनार में, जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और अखिल भारतीय किसान सभा के महामंत्री बीजू कृष्णन ने एलिवेटेड रोड परियोजना से प्रभावित बस्तियों के लोगों के संघर्ष को खुला समर्थन दिया। खचाखच भरे उत्तरांचल प्रेस क्लब सभागार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा:P

“यह लड़ाई सिर्फ ज़मीन की नहीं, इंसानियत और न्याय की है। हम अंतिम सांस तक बस्तियों के साथ खड़े रहेंगे।”

सेमिनार का उद्घाटन किसान सभा उत्तराखंड के अध्यक्ष सुरेन्द्र सजवाण ने किया। मंच से बोले वक्ताओं ने सरकार की दोहरी नीतियों पर तीखा प्रहार किया। बीजू कृष्णन ने याद दिलाया कि चुनावों के समय भाजपा नेताओं ने गरीब बस्तियों को मालिकाना हक देने का वादा किया था, लेकिन अब वही सरकार उन बस्तियों को उजाड़ने पर तुली है।

उन्होंने केरल की विस्थापन नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ की वाम सरकार ने विकास परियोजनाओं से पहले मुआवजा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी। यदि उत्तराखंड सरकार भी यही नीति नहीं अपनाती, तो व्यापक मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।

सेमिनार में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि सरकार यदि मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित नहीं करती तो यह साफ़ तौर पर 2016 के पुनर्वास अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।


प्रमुख बिंदु:

  1. एलिवेटेड रोड परियोजना (रिस्पना-बिंदाल):
    7 मई 2025 के नोटिफिकेशन के तहत गरीब बस्तियों पर सीधा प्रभाव, जबकि अमीर इलाकों और सरकारी भवनों को छोड़ा गया।
  2. दमनकारी नीति:
    बीते दो वर्षों से गरीब परिवारों को लगातार नोटिस, धमकी और बेदखली के दबाव में रखा गया।
  3. न्यायिक दुरुपयोग:
    सरकार न्यायालयों के आदेशों की आड़ में बस्तियों को हटाने की साजिश रच रही है।
  4. लोकतांत्रिक विश्वासघात:
    मुख्यमंत्री सहित भाजपा नेताओं ने चुनावों में मालिकाना हक का वादा किया था, जो आज “जुमला” साबित हुआ।

सेमिनार में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया:

  • “जब तक पुनर्वास, मुआवजा, नागरिक सुविधाएँ और आजीविका की गारंटी नहीं दी जाती — तब तक कोई विस्थापन स्वीकार नहीं।”
  • प्रभावित परिवारों के हक के लिए आंदोलन तेज होगा।
  • मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और हाईकोर्ट में विधिक हस्तक्षेप किया जाएगा।

वक्ताओं में प्रमुख नाम:

नितिन मलेठा, नुरैशा अंसारी, अल्ताफ मोहम्मद, एस.एस. नेगी, शंभू प्रसाद ममगाई, दिले राम रवि, डॉ. सुनील, विजय भट्ट, नवनीत गुसाईं, तन्मय ममगाई, शैलेन्द्र परमार, विप्लव अनंत, डॉ. अनिल कुमार बौद्ध आदि।

सेमिनार का संचालन संयोजक अनन्त आकाश ने किया। सेमिनार में बड़ी संख्या में बस्तीवासी उपस्थित थे, जिन्होंने “मकान नहीं हटेगा, संघर्ष अब बढ़ेगा” के नारों से वातावरण को आंदोलित किया।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *