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वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय

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एलोपैथ के 13,86,150 पंजीकृत चिकित्सक और आयुष चिकित्सा पद्धति के 7,51,768 पंजीकृत प्रैक्टिशनर हैं, चिकित्सक-जनसंख्या के अनुमानित अनुपात 1:811 के प्रति योगदान में जुटे हैं

जिला/रेफरल अस्पतालों को अपग्रेड कर 157 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से 131 मेडिकल कॉलेज पहले से ही कार्यशील हैं

केंद्रीय योजना के अंतर्गत, 22 नए एम्स को मंजूरी दी गई है, इनमें से 19 में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं

ग्रामीण आबादी को समान स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में परिवार दत्तक ग्रहण कार्यक्रम को शामिल किया गया है

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम के तहत, मेडिकल कॉलेजों के दूसरे/तीसरे वर्ष के पीजी छात्रों को जिला अस्पतालों में नियुक्त किया जाता है

कठिन क्षेत्रों में सेवारत कर्मचारियों के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रार्थमिकता के आधार पर प्रवेश और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास व्यवस्था में सुधार जैसे गैर-मौद्रिक प्रोत्साहन भी एनएचएम के तहत शुरू किए गए हैं

विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए एनएचएम चिकित्सकों के विविध विधाओं में कौशल का समर्थन करता है

वर्तमान में देश में कुल 74,306 स्नातकोत्तर और 1,18,190 एमबीबीएस सीटें हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की जानकारी के अनुसार, देश में 13,86,150 पंजीकृत एलोपैथ हैं। आयुष मंत्रालय ने बताया है कि आयुष चिकित्सा पद्धति में 7,51,768 पंजीकृत चिकित्सक हैं। यह मानते हुए कि एलोपैथिक और आयुष दोनों प्रणालियों में 80 प्रतिशत पंजीकृत चिकित्सक उपलब्ध हैं, देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:811 होने का अनुमान है।

देश में चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए उपायों/कदमों में शामिल हैं-

  • जिला/रेफरल अस्पतालों को उन्नत बनाकर नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए केंद्र प्रायोजित योजना अंतर्गत 157 स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों में से 131 नए मेडिकल कॉलेज पहले से ही कार्यरत हैं।
  • एमबीबीएस और पीजी सीटों को बढ़ाने के लिए मौजूदा राज्य सरकार/केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण/उन्नयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना।
  • प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत “सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉकों के निर्माण द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन” के तहत कुल 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 71 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
  • केंद्रीय योजना के अंतर्गत 22 एम्स को मंजूरी दी गई है। 19 एम्स में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा चुके हैं।

ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए उपायों/कदमों में शामिल हैं:-

  • ग्रामीण आबादी को समान स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में परिवार दत्तक ग्रहण कार्यक्रम (एफएपी) को शामिल किया गया है। एफएपी में मेडिकल कॉलेज गांवों को गोद लेते हैं और एमबीबीएस छात्र इन गांवों में परिवारों को गोद लेते हैं।
  • एनएमसी के जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम के अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों के द्वितीय/तृतीय वर्ष के पीजी छात्रों जिला अस्पतालों में कार्यरत है।
  • ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा देने तथा अपने आवासीय क्वार्टरों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों को हार्ड एरिया भत्ता प्रदान किया जाता है।
  • ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सिजेरियन सेक्शन के लिए विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञों /आपातकालीन प्रसूति देखभाल (ईएमओसी) प्रशिक्षित, बाल रोग विशेषज्ञों और एनेस्थेटिस्ट/जीवन रक्षक एनेस्थीसिया कौशल (एलएसएएस) प्रशिक्षित चिकित्सकों को मानदेय प्रदान किया जाता है।
  • समय पर एएनसी जांच और रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों और एएनएम के लिए विशेष प्रोत्साहन, किशोर प्रजनन और यौन स्वास्थ्य गतिविधियों के संचालन के लिए प्रोत्साहन।
  • राज्यों को विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए बातचीत के बाद तय वेतन की पेशकश करने की अनुमति है, जिसमें “आप बोली लगाएं, हम भुगतान करें” जैसी रणनीतियों में लचीलापन भी शामिल है।
  • एनएचएम के अंतर्गत गैर-मौद्रिक प्रोत्साहन जैसे कि दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अधिमान्य प्रवेश तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवास व्यवस्था में सुधार भी शुरू किया गया है।
  • विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए एनएचएम के तहत चिकित्सकों को विविध विधाओं में कौशल प्रदान किया जाता है। स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने के लिए मौजूदा मानव संसाधन का कौशल उन्नयन एनआरएचएम के तहत एक और प्रमुख रणनीति है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


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By udaen

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