राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत, ई-कोर्ट परियोजना भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के विकास के लिए 2007 से लागू एक एकीकृत मिशन मोड परियोजना है, जो “भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना” पर आधारित है। ई-कोर्ट परियोजना के चरण I (2011-2015) का उद्देश्य न्यायालयों को बुनियादी हार्डवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करना था, जबकि चरण II (2015-2023) में वादियों और वकीलों को नागरिक केन्द्रित सेवाएं प्रदान करने पर ध्यान दिया गया, जिसमें एक एंड-टू-एंड डिजिटल प्रणाली का विकास शामिल है, जिसने न्यायपालिका द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं तक जनता की पहुंच के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव किया।
प्रथम चरण में उठाए गए कुछ प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:
- 14,249 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण, 13,683 न्यायालयों में लोकल एरिया नेटवर्क (लैन) की स्थापना।
- 13,436 न्यायालयों में हार्डवेयर तथा 13,672 न्यायालयों में सॉफ्टवेयर स्थापित करना।
- 14,309 न्यायिक अधिकारियों को लैपटॉप प्रदान किए गए और सभी उच्च न्यायालयों में परिवर्तन प्रबंधन अभ्यास पूरा किया गया।
- 14,000 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को उबंटू-लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया।
- 3900 से अधिक न्यायालय कर्मचारियों को सिस्टम प्रशासक के रूप में केस सूचना प्रणाली (सीआईएस) में प्रशिक्षित किया गया।
- 493 न्यायालय परिसरों और 347 संबंधित जेलों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा चालू की गई।
ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत, सरकार की ओर से कई ई-पहलों ने प्रौद्योगिकी का उपयोग करके न्याय तक पहुंच को सुगम बनाने में मदद की है, जिनका विवरण निम्नानुसार है:
- वाइड एरिया नेटवर्क (डब्ल्यूएएन) परियोजना के तहत, देश भर के कुल न्यायालय परिसरों में से 99.5 प्रतिशत को 10 एमबीपीएस से 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ स्पीड के साथ कनेक्टिविटी प्रदान की गई। ई-कोर्ट परियोजना के तहत वाइड एरिया नेटवर्क (डब्ल्यूएएन) परियोजना का उद्देश्य मल्टीप्रोटोकॉल लेबल स्विचिंग (एमपीएलएस), ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी), रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ), वेरी स्मॉल अपर्चर टर्मिनल (वीएसएटी), सबमरीन केबल आदि जैसी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके देश भर में फैले सभी जिला और अधीनस्थ न्यायालय परिसरों को जोड़ना है। यह ई-कोर्ट परियोजना की रीढ़ है, जो देश भर के न्यायालयों में डेटा कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है।
- राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) आदेशों, निर्णयों और मामलों का एक डेटाबेस है, जिसे ई-कोर्ट परियोजना के तहत एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के रूप में बनाया गया है। यह देश के सभी कम्प्यूटरीकृत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों की न्यायिक कार्यवाही/निर्णयों से संबंधित जानकारी प्रदान करता है। मुकदमेबाज़ मामले की जानकारी और 29.94 करोड़ से अधिक आदेशों/निर्णयों (आज की तारीख तक) तक पहुँच सकते हैं।
- गुजरात, गुवाहाटी, उड़ीसा, कर्नाटक, झारखंड, पटना, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, मेघालय और कलकत्ता उच्च न्यायालयों में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हो गई है।
- अब तक, जिला और अधीनस्थ न्यायालयों ने 2,57,14,770 मामलों की सुनवाई की है, जबकि उच्च न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली का उपयोग करके 92,31,640 मामलों (कुल 3.49 करोड़) की सुनवाई की है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 9,94,054 सुनवाई (मार्च 2020 से फरवरी 2025 तक) की है।
- ई-फाइलिंग प्रणाली (संस्करण 3.0) को उन्नत सुविधाओं के साथ शुरू किया गया, जिससे वकील 24X7 किसी भी स्थान से मामलों से संबंधित दस्तावेजों तक पहुंच और अपलोड कर सकें।
- शुल्क आदि के परेशानी मुक्त हस्तांतरण के लिए ई-भुगतान प्रणाली शुरू की गई।
- प्रौद्योगिकी आधारित प्रक्रिया तामील और समन जारी करने के लिए राष्ट्रीय सेवा और इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं की ट्रैकिंग (एनएसटीईपी) शुरू की गई।
- जजमेंट सर्च पोर्टल को बेंच, केस टाइप, केस नंबर, वर्ष, याचिकाकर्ता/प्रतिवादी का नाम आदि जैसी सुविधाओं के साथ शुरू किया गया। यह सुविधा सभी को निःशुल्क प्रदान की जा रही है।
- नागरिक-केन्द्रित सेवाओं तक आसान और परेशानी मुक्त पहुंच की सुविधा के लिए, पूरे भारत में 1610 ई-सेवा केन्द्र (सुविधा केन्द्र) स्थापित किए गए हैं।
- यातायात संबंधी अपराधों की सुनवाई के लिए 21 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में 28 वर्चुअल कोर्ट काम कर रहे हैं। इन वर्चुअल कोर्ट ने 6.66 करोड़ से ज़्यादा मामलों को निपटाया है और 68 लाख से ज़्यादा मामलों में 714.99 करोड़ रुपये से ज़्यादा का ऑनलाइन जुर्माना वसूला गया है।
- इसके अलावा, ई-कोर्ट सेवाओं के तहत, वकीलों/वादियों को केस की स्थिति, वाद सूची, निर्णय आदि के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए एसएमएस पुश एंड पुल, ईमेल, बहुभाषी ई-कोर्ट सेवा पोर्टल, जेएससी (न्यायिक सेवा केन्द्र), सूचना कियोस्क, वकीलों/वादियों के लिए ई-कोर्ट मोबाइल ऐप (अब तक 2.87 करोड़ डाउनलोड) और न्यायाधीशों के लिए जस्टआईएस ऐप (अब तक 21,105 डाउनलोड) के माध्यम से 7 प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं।
- अधिक निष्पक्षता, एकरूपता, पारदर्शिता और गति लाने के लिए, देश भर के जिला और तालुका न्यायालयों में केस सूचना प्रणाली (सीआईएस) संस्करण 4.0 सॉफ्टवेयर लागू किया गया है।
ई-कोर्ट्स चरण III (2023-2027) को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सितम्बर 2023 में ₹7,210 करोड़ के परिव्यय की मंजूरी दी, जो चरण II के वित्त पोषण से चार गुना अधिक है। परियोजना में विभिन्न नई डिजिटल पहलों की परिकल्पना की गई है जैसे डिजिटल और पेपरलेस न्यायालयों की स्थापना, जिसका उद्देश्य अदालती कार्यवाही को डिजिटल प्रारूप में लाना, अदालती रिकॉर्डों (पुराने रिकॉर्ड और लंबित मामले दोनों) का डिजिटलीकरण, अदालतों, जेलों और अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार, यातायात उल्लंघन के औपचारिक निर्णय से परे ऑनलाइन अदालतों की गुंजाइश, सभी न्यायालय परिसरों में ई-सेवा केन्द्रों की संतृप्ति, डिजिटल न्यायालय के रिकॉर्डों को आसानी से प्राप्त करने और उनका समर्थन करने के लिए अत्याधुनिक और नवीनतम क्लाउड आधारित डेटा संग्रह, सॉफ्टवेयर अनुप्रयोग, लाइव स्ट्रीमिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य आदि, लंबित मामलों के विश्लेषण, भविष्य के मुकदमों का पूर्वानुमान लगाने आदि के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर) जैसे इसके उपसमूहों का उपयोग। इस प्रकार, शासन के साथ प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने के सरकार के प्रयासों ने देश के सभी नागरिकों के लिए न्यायालय के अनुभव को सुविधाजनक, सस्ता और परेशानी मुक्त बनाकर न्याय प्राप्त करना आसान बना दिया है। आज तक, अनुलग्नक I में दिए गए विवरण के अनुसार, 18,735 न्यायालयों को डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रदान किया गया है।
यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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अनुलग्नक-I
| क्रम संख्या | उच्च न्यायालय | राज्य | अदालत परिसर | अदालतें |
| 1 | इलाहाबाद | उत्तर प्रदेश | 180 | 2222 |
| 2 | आंध्र प्रदेश | आंध्र प्रदेश | 218 | 617 |
| 3 | बाम्बे | दादरा और नगर हवेली | 1 | 3 |
| दमन और दीव | 2 | 2 | ||
| गोवा | 17 | 39 | ||
| महाराष्ट्र | 471 | 2157 | ||
| 4 | कलकत्ता | अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 4 | 14 |
| पश्चिम बंगाल | 89 | 827 | ||
| 5 | छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़ | 93 | 434 |
| 6 | दिल्ली | दिल्ली | 6 | 681 |
| 7 | गुवाहाटी | अरूणाचल प्रदेश | 14 | 28 |
| असम | 74 | 408 | ||
| मिजोरम | 8 | 69 | ||
| नागालैंड | 11 | 37 | ||
| 8 | गुजरात | गुजरात | 376 | 1268 |
| 9 | हिमाचल प्रदेश | हिमाचल प्रदेश | 50 | 162 |
| 10 | जम्मू और कश्मीर और लद्दाख | केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर और केन्द्र शासित लद्दाख | 86 | 218 |
| 11 | झारखंड | झारखंड | 28 | 447 |
| 12 | कर्नाटक | कर्नाटक | 207 | 1031 |
| 13 | केरल | केरल | 158 | 484 |
| लक्षद्वीप | 1 | 3 | ||
| 14 | मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश | 213 | 1363 |
| 15 | मद्रास | पुदुच्चेरी | 4 | 24 |
| तमिलनाडु | 263 | 1124 | ||
| 16 | मणिपुर | मणिपुर | 17 | 38 |
| 17 | मेघालय | मेघालय | 7 | 42 |
| 18 | उड़ीसा | ओडिशा | 185 | 686 |
| 19 | पटना | बिहार | 84 | 1142 |
| 20 | पंजाब और हरियाणा | चंडीगढ़ | 1 | 30 |
| हरियाणा | 53 | 500 | ||
| पंजाब | 64 | 541 | ||
| 21 | राजस्थान | राजस्थान | 247 | 1240 |
| 22 | सिक्किम | सिक्किम | 8 | 23 |
| 23 | तेलंगाना | तेलंगाना | 129 | 476 |
| 24 | त्रिपुरा | त्रिपुरा | 14 | 84 |
| 25 | उत्तराखंड | उत्तराखंड | 69 | 271 |
| कुल | 3452 | 18735 | ||
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