भारी बरसात के कारण बीते 29 जून से बाधित पड़ी कोटद्वार भाबर की लाइफ लाइन चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग को करीब चार माह बाद हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया है। मार्ग पर जीएमओयू की बसों का संचालन भी शुरू हो गया है। वाहनों का संचालन शुरू होने से क्षेत्रवासियों को राहत मिली है। अब उन्हें यूपी होते हुए आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी।
11 किमी चिलरखाल-लालढांग मोटर मार्ग लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र का एक प्रमुख वन मोटर मार्ग तो है ही, यह राज्य की सीमा के अंदर कोटद्वार से हरिद्वार को सड़क संपर्क से जोड़ने वाला भी एकमात्र संपर्क मार्ग है। इसी मार्ग से लैंसडौन वन प्रभाग के मुख्यालय से लालढांग रेंज कार्यालय व वन क्षेत्र में वन कर्मियों और अधिकारियों का आवागमन होता है। बरसात के समय भारी बारिश से सिगड्डीसोत व मैहली सोत नदियां उफान पर रहीं, जिससे पूरे चार महीने आवागमन बाधित रहा। सड़क की हालत खराब होने से इस मार्ग पर लैंसडौन वन प्रभाग के कर्मचारी और अधिकारी भी वाहनों से पेट्रोलिंग नहीं कर पा रहे थे। वन विभाग ने मार्ग को पेट्रोलिंग लायक दुरुस्त किया तो इस पर अन्य हल्के वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई। गड्ढों को रेत मिट्टी से भरकर अब बड़े वाहनों के लायक भी बना दिया गया है। सोमवार से इस मार्ग पर जीएमओयू की बसें भी चलनी शुरू हो जाएंगी।
लालढांग निवासी अनिल चमोली व सिगड्डी निवासी राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि मार्ग के खुलने से रोजमर्रा के काम से आने वाले लोगों को सहूलियत हो गई है। इस मार्ग पर कोटद्वार भाबर के साथ ही लालढांग व चमरिया क्षेत्र के काश्तकार, दुग्ध विक्रेता और स्कूली बच्चे नियमित रूप से आवाजाही करते हैं। वार्ड नंबर 36 सिगड्डी क्षेत्र के निवर्तमान पार्षद जगदीश सिंह मेहरा का कहना है कि सड़क को काफी पहले खुल जाना चाहिए था। देर से ही सही सड़क खुलने से राहत मिली है। जीएमओयू के सचिव विजयपाल सिंह नेगी ने बताया कि सोमवार से चिलरखाल-लालढांग मार्ग से यात्री बसों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा, जो वाहन स्वामी यूपी के नहर वाले रास्ते जाना चाहेंगे, वे उधर से भी हरिद्वार के लिए आवाजाही सकते हैं।
चिलरखाल-लालढांग मार्ग को वन विभाग ने अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की पेट्रोलिंग लायक दुरुस्त करवा दिया है। हल्के वाहन भी चल रहे हैं। यात्री वाहनों की आवाजाही भी शुरू हो गई है।
-विपिन चंद्र जोशी, रेंज अधिकारी लालढांग, लैंसडौन वन प्रभाग
