हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में उत्तरी भारत के पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और उसे प्रचारित करने के मकसद से विवि के फोरेंसिक साइंस और बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने व्याख्यान का आयोजन किया।
इसमें आईएएसएसटी (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उन्नत अध्ययन संस्थान) गुवाहाटी के निदेशक प्रो. आशीष के मुखर्जी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। प्रो. मुखर्जी ने कहा कि उत्तरी भारत में पारंपरिक खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की समृद्ध धरोहर है। उन्होंने बताया कि आईएएसएसटी केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक स्वायत्त संस्थान है। आयोजन में विवि के सभी विभागाध्यक्षों शिक्षकों, शोधार्थियों और पीजी के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। बायोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. रीना गुप्ता ने व्याख्यान देने आए प्रो. मुखर्जी और शिक्षकों का स्वागत किया। जीव विज्ञान के अधिष्ठाता प्रो. दूनी चंद ने व्याख्यान का संचालन करते हुए प्रो. मुखर्जी का परिचय करवाया। उन्होंने कहा कि संस्थान प्रोबोयोटिक खाद्य पदार्थ को बढ़ावा देने और इसको लेकर अनुसंधान करने में लगा है। कहा कि असम में स्वयं सहायता समूहों से इसमें सहयोग लिया जा रहा है। व्याख्यान के बाद बायोटेक्नोलॉजी और फोरेंसिक साइंस विभाग के शिक्षकों के साथ चर्चा सत्र भी हुआ। प्रो. मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन भी साइन किया। अंत में फोरेंसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ठाकुर ने सभी का आभार जताया।
