जनपद में काश्तकारों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने तथा पहाड़ में पलायन को रोकने के उद्देश्य से जिलाधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल ने थलीसैंण ब्लाक के मुसेठी गांव का भ्रमण किया। उन्होंने काश्तकारों को ना सिर्फ फल और बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए प्रेरित किया बल्कि स्वरोजगार अपनाने के टिप्स भी दिये। जिलाधिकारी ने खाली व बंजर जगहों पर बागवानी के लिए भी काश्तकारों को जागरूक किया। उन्होंने कृषि तथा उद्यान विभाग को काश्तकारों को बागवानी के साथ बेमौसमी फसल उत्पादन की तकनीकी प्रशिक्षण मुहैया कराने के निर्देश दिये। जनपद के दूरस्थ क्षेत्र के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने पहाड़ों में लगातार हो रहे पलायन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ के घर गांव में ही युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से ही बेहतर आय प्राप्त होगी तो युवा पलायन नहीं करेगें। वहीं मुसेठी गांव में अभी तक पलायन नहीं होने पर जिलाधिकारी ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि सभी युवा आज शिक्षित हैं। आधुनिक प्रशिक्षण लेकर युवा खाली खेतों व बंजर जगहों पर कृषि, उद्यानीकरण और बागवानी से अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। यही नहीं काश्तकारों के लिए जनपद के कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय के कुशल विशेषज्ञों द्वारा समयसमय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। घरगांवों में 2020 काश्तकारों की टीम बनाकर उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। काश्तकारों के ग्रुप बनाकर भी उन्हें बागवानी की वैज्ञानिक जानकारियां दी जाएंगी। इसके अलावा जिलाधिकारी ने काश्तकारों को पहाड़ी फसलों के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। कहा कि पहाड़ के मंडवा, धान व दालें अपने आप में आयुर्वेदिक औषधी है। उन्होंने पहाडी धान समेत अन्य पारंपरिक फसलों के उत्पादन पर जोर दिया। कहा कि अकेले पहाड़ी धान का मूल्य बढ़ाया जाए तो काश्तकारों की आर्थिकी स्वयं ही बढ़ने लगेगी। सरकार का भी पहाड़ी फसलों के पुनः उत्पादन को लेकर काफी रूझान है। सरकार की ओर से काश्तकारों के लिए हर संभव सहायता किये जाने के लिए भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि अब काश्तकारों को हर समय विभागों द्वारा भी सहयोग प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि संगठित होकर बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किये जा सकते हैं। अच्छी पैदावार होने के फलस्वरूप स्थानीय स्तर पर ही विपणन केंद्र खोले जाएंगे। सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर ही फसल क्रय की जाएगी। मूल्य से वंचित फसल का मिनिमम सर्पोट प्राइज तय किया जाएगा। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी दीप्ति सिंह ने लोगों को पलायन रोकने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक जलवायु के आधार पर भी खेती व बागवानी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसी तर्ज पर अपर उद्यान अधिकारी प्रभुदयाल ढौंडियाल ने बताया कि क्षेत्र के तीन हेक्टेयर क्षेत्रफल में 2150 सेब की कई प्रजाति का पौधरोपण किया गया। जिसमें रेड चीफ, सुपर चीफ, आॅर्गन स्पर, गोल्डन स्पर आदि प्रजातियां शामिल हैं। सेब प्रजाति का पौधरोपण होते देख ग्रामीणों ने क्षेत्र में संग्रह केंद्र खोलने की मांग उठाई। जिस पर जिलाधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर संग्रह केंद्र खोलने की बात कही। इस मौके पर ग्रामीणों ने जंगली सुअरों के आतंक से खड़ी फसलों के नष्ट होने की बात जिलाधिकारी के समक्ष रखी। जिस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। इस मौके पर सहायक उद्यान अधिकारी ताजबर सिंह पंवार, अधिशासी अभियंता लोनिवि राजीव रंजन, कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी लोकेंद्र बिष्ट, मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा, काश्तकार सरस्वती देवी, पुष्पा देवी, रेखा देवी, कल्पेश्वरी देवी, सरोजनी देवी आदि उपस्थित रहे। फोटो जिला सूचना अधिकारी पौड़ी गढ़वाल 
