प्रेसविज्ञप्ति सूचना/पौड़ी दिनांक 25 फरवरी 2019, जिलाधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल ने अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित जिला जलागम समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों को अपने ही क्षेत्र में काश्तकारी मिलने से पलायन पर अंकुश लगेगा। उन्होंने जलागम के सहयोग से विभागों में हो रहे कार्याें की जानकारी आम जनमानस को देने के भी निर्देश दिये। कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों के कार्याें को अन्य लोगों को भी जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करें। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि ब्लाकों में आयोजित होने वाले काफ रैली की जानकारी जनमानस को देना सुनिश्चित करें। साथ ही स्वीप को भी जोड़ते हुए लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करें। उन्होंने उप परियोजना निदेशक जलागम को निर्देशित किया कि योजनाओं को धरातल में उतारते समय काश्तकारों की काश्त के प्रति जानकारी संकलित करें तथा उनमें किस फसल का रूझान है, के साथ ही फसल से पूर्व एवं उत्पादन के बाद के क्रियाकलापों की फोटो एवं वीडियो भी संकलित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को सरकारी तंत्र से जोड़ना होगा। जिन उत्पादों की एमएसपी निर्धारित नहीं है राज्य सरकार से दर निर्धारित करेंगे। जिससे काश्तकारों को अपने जैविक उत्पादन के प्रमाण के आधार पर बाहरी व्यापारी आकर फसल क्रय कर सकें। इनमें ग्रामीण काश्तकारों को स्थानीय स्तर पर ही आर्थिकीय संवर्द्धन के साथ रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। खाली हाथों को रोजगार मिलने से उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि हर परिवार को जागरूक करते हुए सही प्रशिक्षण एवं आत्मनिर्भर बनायें। जिस हेतु ठोस कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिये। उन्होंने मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को संबंधित विभाग एवं वन पंचायत के साथ संयुक्त निरीक्षण कर चारा एवं नेपियर ग्रास को बढ़ावा देने के निर्देश दिये। साथ ही गरीब किसानों को प्राथमिकता के आधार पर लाभांवित करने को कहा। उन्होंने संबंधित अधिकारी को फार्मर ग्रुप बनाकर काश्त के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य एवं आधुनिक तकनीकि को साझा करते हुए जागरूक करने को कहा। जबकि ब्लाकस्तर पर किसानों को चिन्हित कर एक सप्ताह के भीतर प्रशिक्षण देने को कहा। वहीं संबंधित फसल वाले क्षेत्र की महत्वता के आधार पर प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंगशाला स्थापित करने के निर्देश दिये। इस दौरान जिलाधिकारी ने क्षेत्र से आये काश्तकारों से विभागों के तहत की गई कार्यों की जानकारी ली। जिस पर रवीन्द्र कुमार ग्राम गोरली ने बताया कि पहले मार्चअप्रैल से ही क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या थी। चालखाल बनने से मई तक पानी की समस्या नहीं रहती है। वहीं पातल गांव के कुलदीप जोशी ने कहा कि उनके द्वारा चारपांच वर्ष पूर्व सेब के ढाई सौ पौधे लगाये गये। जिस पर जिलाधिकारी ने पौधों के रखरखाव के बारें में पूछा तो श्री जोशी ने जानकारी से अनभिज्ञयता बतायी। जिस पर जिलाधिकारी ने उद्यान अधिकारी को स्थलीय निरीक्षण कर सेब के पौधे के संबंध में संपूर्ण जानकारी देने के निर्देश दिये। बैठक में उप परियोजना निदेशक जलागम ने जनपद में परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में 21432 क्षेत्रफल के सापेक्ष 9211 क्षेत्रफल में परियोजना से संबंधित कार्य किया जा रहे हैं। जिसमें 175 राजस्व गांव, 62 ग्राम पंचायत, 5102 परिवार जिनकी कुल जनसंख्या 22046 है। जनपद में परियोजना से करीब दो लाख 64 हजार क्षेत्र आच्छादित है। इस मौके पर डीएफओ लक्ष्मण सिंह रावत, मुख्य विकास अधिकारी दीप्ति सिंह, उप परियोजना निदेशक जलागम अखिलेश तिवारी, सीवीओ एसके सिंह, ईई एमआई राजीव रंजन, अपर उद्यान निरीक्षक प्रभुदयाल ढौंडियाल समेत संबंधित विभागों के जिलास्तरीय अधिकारी व समिति के पदाधिकारी सहित उमेश रावत, पूनम चैहान, हिमानी आदि ग्रामीण उपस्थित रहे। फोटो जिला सूचना अधिकारी पौड़ी गढ़वाल

