प्रदर्शन में मृतक की पत्नी रीतादेवी तथा तीनों 29 जुलाई 024 आज मृतक रणबीरसिंह एवं उसके परिजनों को न्याय देने के लिऐ तथा पीड़ित परिवार को भरण पोषण हेतु समुचित मुआवजा देने की मांग को लेकर आज राज्य सचिवालय पर संयुक्त प्रदर्शन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया ।ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युषसिंह को दिया गया । प्रदर्शन में सीपीएम ,आयूपी ,यूकेडी ,सीटू ,एटक ,जनवादी महिला समिति ,एस एफ आई ,नव चेतना समिति ,उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी परिषद ,किसान सभा ,एआईएलयू ,भीम आर्मी ,बीजीवीएस आदि संगठनों के लोग शामिल थे । राज्यसचिवालय में आयोजित सभा में 22 जून 024 को कोतवाली पुलिस ऋषिकेश में पुलिसकर्मियों द्वारा अभिरक्षा में बुरी तरह से मारपीट गम्भीर रूप से घायलघनसाली टिहरी का रहने वाला रणबीर सिंह की पिछले 25 जून 024 को सुद्धोवाला जिला कारागार में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई । काफी छानबीन के बाद पता चला है कि रणबीरसिंह को ढालवाला टिहरी से फर्जी केश में पकड़ कर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के आधार न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेजा गया जहाँ उसकी 25 जुलाई 024 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई वक्ताओं ने कहा है कि मुख्य सचिव महोदय से भेंटकर उन्हें रणबीर सिंह प्रकरण में बिस्तर से अवगत कराया जिसपर उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक जांच सौंपी । वक्ताओं ने कहा फर्जी पोस्टमार्टम ,चिकित्सा प्रमाण पत्र तथा झूठी पुलिस रिपोर्ट तैयार कर रणबीर सिंह कि न्यायिक अभिरक्षा में मृत्यु को सामान्य घटना दिखाकर आरोपी ऋषिकेश पुलिस ,जिला कारागार का बरिष्ठ अधीक्षक न्यायिक जांच के माध्यम से रफा दफा करने के फिराक में हैं । वक्ताओं ने कहा है कि इससे पहले विभिन्न राजनैतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों की ओर से ऋषिकेश थाना कोतवाली में 22 जून 024 को गिरफ्तार रणबीरसिंह पुत्र स्व सरोपसिंह ग्राम मन्धार तहसील घनसाली की देहरादून जिला कारागार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच तथा पीड़ित के परिजनों को भरण पोषण हेतु समुचित मुआवजा दिलवाने का अनुरोध जिलाधिकारी महोदय देहरादून तथा जिलाधिकारी महोदय देहरादून के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार से कर चुके हैं । दिनांक 22जून 024 लगभग सांय 5:30 कोतवाली ऋषिकेश देहरादून पुलिस रणबीरसिंह के ढालवाला जनपद टिहरी गढ़वाल किराये के मकान पर आये तथा भद्दी भद्दी गालियां देकर उसे घसीट कर ले गये तथा कहा कि इसको हम ठीक करेंगे , पत्नी व परिजनों के बार बार गुजारिश करने के बावजूद वे अनर्गल शब्दों तथा गाली गलोज देते रहे ।आस पास पुलिस चौकियों में तलाश करने के बाद अगले दिन लगभग यानि 23 जून 024 लगभग 2 बजे रणबीरसिंह की पत्नी श्रीमती रीतादेवी कोतवाली ऋषिकेश गई तो तब तक उसके पति की पुलिस अभिरक्षा में बुरी तरह पिटाई हो चुकी थी , पुलिस ने रणबीरसिंह के खिलाफ झूठा केस दर्ज कर ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय के चिकित्सकों से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाई जिसके आधार पर एसजेएम ऋषिकेश कोर्ट ने रणबीरसिंह को जिला कारागार देहरादून भेजा । वक्ताओं ने कहा है कि,25 जून 024 दिन में मृतका की पत्नी जब अपने पति को मिलने जिला कारागार गई तो उसके पति कि हालात नाजुक थी तथा चल फिर नहीं पा रहा था तथा शरीर पर असहनीय दर्द बता रहा था तथा कह रहा था उसे जेल में नींद आदि की गोलियां दि जा रही है ,उसने अपनी पत्नी को कहा कि उसकी जान खतरे में है । कुछ घण्टे बाद सांय जेल प्रशासन ने रणबीरसिंह की मृत्यु कि सूचना उसकी पत्नी को दि । मान्यवर ,हकीकत यह है कि पुलिस एवं जिला प्रशासन के अमानवीय कृत्यों के परिणामस्वरूप रणबीरसिंह की मृत्यु जिला कारागार देहरादून में ही हो चुकी थी , दून अस्पताल लाना एक औपचारिकता थी । मान्यवर, जेल प्रशासन एवं पुलिस दो दिन बाद रात्रि को कोरनेशन अस्पताल देहरादून में पोस्टमार्टम कर इसे सामान्य मृत्यु घोषित करने के लिऐ डाक्टरों के साथ मिलकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयारकर पुलिस एवं जेल प्रशासन द्वारा अपने को बचाने के लिऐ कुत्सित प्रयास किया गया किन्तु रणबीरसिंह को पहुंचे गहरे जख्म साफ – साफ कर रहे थे कि दाल में कुछ काला है ।संदिग्ध परिस्थितियों में मृतक की जांच के लिऐ मृतक रणबीर सिंह की पत्नी श्रीमती रीता देवी ने जिलाधिकारी महोदय तथा बरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई । मान्यवर ,इस बीच सामाजिक एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से भेंटकर उन्हें यथास्थिति से अवगत कराया परिणामस्वरूप पुलिस के हाथ पांव फूल गये उसके आला अधिकारियों ने तब जाकर रणबीरसिंह की पोस्टमार्टम तथा मेडिकल रिपोर्ट परिजनों को उपलब्ध करायि जिससे पूरे षड़यंत्र आपसी मिलीभगत का खुलासा हुआ तथा संगठित अपराध का पर्दाफाश हुआ किस हद तक तथाकथित जिम्मेदार लोग बर्दी तथा अपने ओहदों का दुरूपयोग कर सकते हैं ,पता चला है कि इस प्रकरण में कोतवाली ने दो पुलिसकर्मियों निलम्बित कर पुलिस ने अपने घृणित अपराध में पर्दा डालने की कोशिश की । मान्यवर ,पोस्टमार्टम ,पुलिस रिपोर्ट ,मेडिकल रिपोर्ट तथा जेल अधीक्षक अपनी अपनी रिपोर्ट में एक सुर बोल रहे हैं कि उसे पुरानी बीमारी थी ,वह दारूबाज था ,अभियुक्त के रूप में रणबीरसिंह की प्रथम मेडिकल रिपोर्ट माननीय स्पेशल जुडिशियल मजिस्ट्रेट ऋषिकेश ने भी देखि ऐसा लगता रणबीरसिंह की नाजुक हालात का एहसास नहीं कर पाये परिणामस्वरूप इतनी अमानवीय घटना हुई । वक्ताओं ने कहा है कि ,रणबीरसिंह कि अवैध गिरफ्तारी से मौत तक तथा उसके बाद जो फर्जी मेडिकल/पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर रणबीरसिंह के साथ हुऐ जधन्य कृत ने साबित कर दिया किस तरह कानून के रखवालों ने कानून के साथ खिलवाड़ कर रणबीरसिंह की हत्या को हादसे में बदल दिया । वक्ताओं ने कहा है कि रणबीरसिंह कि अन्तेष्टि के लिऐ शव परिजनों चन्द्रभागा पुल पर कोतवाली ऋषिकेश ने यह कर सौंपा कि यहीं तक उनका कार्यक्षेत्र है ,जबकि इससे तीन दिन इसी कोतवाली कि पुलिस बिना अनुमति के दूसरे जिले में जाकर रणबीरसिंह को गिरफ्तार करती है ,ऋषिकेश पुलिस कर्मियों अमानवीयता को दर्शाने के लिऐ प्रर्याप्त है ।यही नहीं जिलाधिकारी महोदया के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली पुलिस तथा पुलिस आला अधिकारियोंं द्वारा रणबीरसिंह के परिजनों को दस्तावेज उपलब्ध कराये जिससे तमाम कुचक्रों का खुलासा हुआ । वक्ताओं ने कहा है कि ,देहरादून में कुछ साल पहले हुऐ फर्जी रणबीर इनकाऊन्टर के बाद जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के अनेक कृत्यों के बाद रणबीरसिंह के साथ ऋषिकेश पुलिस अभिरक्षा से लेकर सुद्धोवाला जेल में जो कुछ हुआ वह मानवता को शर्मशार करने वाली जघन्यतम घटना है जिसमें मानवाधिकारों का खुलेआम उलंघन हुआ है ।ताकत एवं पैसे के बल पर सब कुछ खरीदा गया है । यह न्यायहित में सरकार से तत्काल निम्नलिखित अनुरोध करता है ;- (1)रणबीरसिंह की अभिरक्षा में हुई संदिग्ध मृत्यु कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायधीश से जांच करवाई जाय । (2)सम्भव हो सके तो इस संदिग्ध मृत्यु कि जांच स सिबिआई से करवाई जाये । (3) जांच के दायरे में कोतवाली ऋषिकेश पुलिस ,क्षेत्राधिकारी पुलिस ऋषिकेश ,चिकित्साधिकारी राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश ,बरिष्ठ जेल अधीक्षक जिला कारागार एवं उसे जुड़े स्टाफ ,दून अस्पताल के चिकित्सक तथा पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों तथा ऋषिकेश एजेएम कोर्ट प्रक्रिया को शामिल किया जाये । (4) मामले से जुड़े सभी के खिलाफ निलम्बन तथा स्थान्तरण कि कार्यवाही सुनिश्चित की जाये । (5)मृतक के परिजनों की जानमाल की सुरक्षा की जाये । (6)रणबीरसिंह कि विधवा तथा तीन बच्चों के भरण पोषण के लिऐ सरकार समुचित दे ।सिटी मजिस्ट्रेट ने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया । इस अवसर पर नवनीत गुंसाई अध्यक्ष आयूपी , अनन्त आकाश सचिव सीपीआई (एम) ,प्रमिला रावत बरिष्ठ नेत्री ,यूकेडी, लेखराज महामंत्री सीआईटीयू सुरेन्द्र सिंह सजवाण , अध्यक्ष किसान सभा एटक महामंत्री अशोक शर्मा उत्तराखण्ड इन्दुनौडियाल प्रान्तिय उपाध्यक्ष जनवादी महिला समिति ,सिपिएम राज्य सचिव राजेन्द्र नेगी , राजेन्द्र पुरोहित जिलासचिव ,सिपिएम ,शम्भूप्रसाद ममगांई एआईएलयू नितिन मलेठा अध्यक्ष एस एफ आई,अनिता कोठियाल संयुक्त सचिव यूकेडी ,शशिबंगवाल अध्यक्ष यूकेडी ,विमला बहुगुणा ऋषिकेश यूकेडी,एस एफ आई शैलेन्द्र परमार , ,आजम खान भीम आर्मी , वालेश बवानिया ,अमित पंवार(आरयूपी ), ,कमरूद्दीन ,महामंत्री किसान सभा बिजय भट्ट ,इन्द्रेश नौटियाल(बीजीवीएस ) नवचेतना समिति की अध्यक्षा दीप्ति रावत बिष्ट ,सोनिया आनन्द ,सुरेशकुमार ,धामि,सीआईटीयू के किशन गुनियाल भगवन्त पयाल ,एस एस नेगी ,नरेन्द्र ,मोनिका ,प्रेंमा,महिला समिति , सीमा लिंगवाल बिन्दा मिश्रा ,किसान से माला गुरूंग ,सुधा देवली , इस्लाम ,ब्रह्मा नन्द कोठारी , नरेंद्र सिंह , दया देवी , बबीता , विप्लव अनन्त , मालती देवी , आशा यूनियन से सुनीता चौहान , कलावती चन्दोला , आरती देवी , ममता देवी आदि ने विचार व्यक्त किये । प्रदर्शन कनक चौराहे से शुरू होकर परेड ग्राउंड चौराहा से होता हुआ सुभाष रोड होता हुआ सचिवालय पर पुलिस से काफी झड़प के बाद सभा में परिवर्तित हो गया ।