चमोली के सुदूर गांव की बेटी ने ट्यूसन से चलाया खर्च और फिर सिविल सेवा में दिखाया अपना जलवा!
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सिविल सेवा परीक्षा 2019 में उत्तराखण्ड के अनेक होनहार उम्मीदवारों ने परीक्षा पास कर परचम लहराया है लेकिन सबसे उम्दा कहानी चमोली जिले की देवाल विकासखंड के रामपुर गांव की कु.प्रियंका की है। प्रियंका ने गॉंव से पढ़ाई की और पिता किसान हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग किए यूपीएससी की यह कठिनतम परीक्षा पास की। गोपेश्वर से स्नातक परीक्षा पास करने के बाद वह एलएलबी के लिए देहरादून के डीएवी कॉलेज में अंतिम सत्र की छात्रा है।
सपना तो प्रियंका का जज बनने का था (जो प्रेरणा उन्हें अपने मामा से प्रेरणा मिली जो विकासनगर के मुंसिफ मजिस्ट्रेट हैं।) लेकिन बन गयी आईएएस। प्रियंका ने ट्यूशन कर अपना खर्चा जुटाया। उन्हें आज भी सबसे अच्छा काम घर में पूरे परिवार के लिए खाना बनाना लगता है। वे इस क्षण को एन्जॉय करती है। उन्हें आज भी याद है जब माता-पिता ने उनको 12वीं के लिए गोपेश्वर भेजा तो उन्हें 25 किमी. की यात्रा कर रोड हेड तक पहुंचना पड़ा था।
एक डीएम की विजिट ने उनका कैरियर बदल दिया। जब वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी तो उनके कालेज में डीएम चमोली का दौरा हुआ। उसके स्वागत के लिए सभी खड़े थे, भव्य तैयारी थी। उनके मन पर यह छाप पड़ी कि आखिर कौन यह अधिकारी हैं जिसके लिए सभी खड़े हैं और व्यापक तैयारी हुई। वे सीधे जाकर उनसे से मिली कि आप कौन हैं?जो आपके लिए इतने सारे लोग खड़े हैं। तब डीएम ने उन्हें अपना परिचय बताया कि मैं इस जिले का डीएम हूँ। एक गांव की छात्रा का साहस बढ़ा और वह पूछ बैठी कि क्या मैं भी डीएम बन सकती हूं। इस पर डीएम ने उन्हें बताया कि जरूर बन सकती हो और इसके लिए तैयारी करनी होती है। बस, यहीं से प्रियंका ने ठान ली थी कि वह भी आगे बढ़ेगी।
प्रियंका की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। 05 अगस्त को प्रियंका डीडी उत्तराखंड के स्टूडियोज में टीवी इंटरव्यू के लिए पहुंची और उन्होंने अपनी इस यात्रा के ढेर सारे अनुभव साझा किए।
इसी तरह रुद्रप्रयाग जिले के मुकुल जमलोकी की कहानी भी कम नहीं है। दूरदर्शन के वरिष्ठ कैमरामैन ओमप्रकाश जमलोकी का सुपुत्र मुकुल ने लगातार तीसरी बार यह परीक्षा पास कर अपनी रैंकिंग को अच्छा किया। 2017,2018 और 2019 में भी उन्होंने यह अखिल भारतीय परीक्षा पास की। इस समय वे भारतीय पोस्टल सर्विस में हैं और ट्रेनी के रूप में देहरादून में हैं। देहरादून और दिल्ली से पढ़े मुकुल अपने शुरुआती दिनों से ही मेधावी छात्र रहे।
सौजन्य- दूरदर्शन उत्तराखंड
