कोटद्वार। घाड़ क्षेत्र के अंतर्गत भूस्खलन प्रभावित गांव पुलिंडा में खतरा और भी बढ़ गया है। गत पांच दिन से हो रही भारी बारिश से अब गांव के पूरब और पश्चिम दिशा में भी भूस्खलन होने लगा है, जिससे गांव में रह रहे ग्रामीणों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने उनके पुनर्वास की मांग उठाई है।
विस्थापन और पुनर्वास संघर्ष समिति पुलिंडा के अध्यक्ष केसर सिंह नेगी ने बताया कि पूर्व में जहां दक्षिण और उत्तर दिशा में ही भूस्खलन हो रहा था, वहीं पांच दिन से क्षेत्र में हो रही मूसलाधार बारिश से गांव के पूरब और पश्चिम दिशाओं में भी भूस्खलन होने लगा है। ग्रामीणों के मकान व गोशाला खेत खतरे की जद में हैं और गांव रहने लायक नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि सत्तर के दशक से गांव में लगातार भूस्खलन हो रहा है। पूर्व में भू वैज्ञानिकों ने गांव का सर्वे कर ग्रामीणों का पुनर्वास करने की संस्तुति की थी। ग्रामीण भी वर्ष 2006 से गांव का विस्थापन और पुनर्वास करने की मांग करते आ रहे हैं। राजस्व विभाग की ओर से 27 सितंबर, 2006 में सिगड्डी के पापीडांडा खाम में भूमि का चयन भी कर लिया था। तीन सितंबर, 2019 को अपर जिलाधिकारी पौड़ी डॉ. एसके बरनवाल ने गांव का निरीक्षण करने के साथ ही चयनित भूमि का संयुक्त निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने चयनित भूमि को राजस्व विभाग की बताते हुए इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग उत्तराखंड को भेजी थी। उन्होंने एक बार पुन: प्रदेश सरकार से गांव के सभी 121 परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास करने की मांग उठाई है।
