कोरोना महामारी की रोकथाम को लॉकडाउन की वजह से बदहाल हुई प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौटने लगी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार ने करीब 300 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। 90 फीसद उद्योगों का संचालन प्रारंभ हुआ है। राज्य में पर्यटन को गति देने को योजना बनाई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों की बैठक में त्रिवेंद्र सिंह रावत भी शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बैठक में कोविड-19 व अनलॉक-एक के बाद की परिस्थितियों पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन की दिशा में उठाए गए कदमों पर भी चर्चा हुई।

उन्होंने बताया कि राज्य में तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने की दिशा में काम किया गया है। राज्य ने काफी प्रगति की है। राज्य के युवाओं और अन्य राज्यों से लौटे प्रवासियों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। योजना का युवाओं का अधिक लाभ दिलाने को जिलाधिकारियों को 110 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में मनरेगा में 23 हजार से अधिक नए रजिस्टे्रशन कराए गए हैं। इनमें से 17 हजार से अधिक लोगों को काम उपलब्ध कराया गया है। मनरेगा में कुल 3.64 लाख श्रमिक नियोजित हैं। कृषि एवं इससे संबंधित कार्यों के लिए पांच हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए है
3340 करोड़ की परियोजना में प्रवासियों को स्वरोजगार
कोरोना संकट के चलते उत्तराखंड में करीब ढाई लाख प्रवासी गांव लौट चुके हैं और बदली परिस्थितियों में उनके लिए रोजगार की बड़ी चुनौती है। इससे पार पाने में सहकारिता विभाग बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। 3340 करोड़ की समेकित सहकारी विकास परियोजना के जरिये प्रवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की तैयारी है। इसका खाका खींचा जा रहा है। आने वाले दिनों में परियोजना के तहत विभिन्न क्षेत्रों में प्रवासियों को उनके अनुभव के आधार पर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। स्वरोजगार को बढ़ावा देकर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना शुरू की गई है।
