उत्तराखंड :लैंसडाउन के विधायक दिलीप सिंह रावत ने दी प्रतिक्रिया
उत्तराखंड :लैंसडाउन के विधायक दिलीप सिंह रावत ने दी प्रतिक्रिया उत्तराखंड के पौड़ी जिले के लैंसडाउन विधानसभा के विधायक दिलीप…
EarthNity with social development and rural enterpreneurship
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कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, पौड़ी गढ़वाल आईटीआई श्रीनगर में लगेगा रोजगार मेला, ऑटोमोबाइल सेक्टर की बड़ी कंपनियां लेंगी हिस्सा सूचना/पौड़ी/28…
भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये एक यात्रा PIB Delhi मुख्य बिंदु भारत में 111 राष्ट्रीय जलमार्गों का एक विस्तृत नेटवर्क है, जिसकी कुल लंबाई 20,187 किमी है और यह 23 राज्यों तथा चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है। इनमें से इस समय 32 राष्ट्रीय जलमार्ग संचालन में हैं।केंद्रीय बजट 2026–27 में अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडबल्यूएस) को संचालन में लाने की घोषणा की गई है।वित्त वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल परिवहन 145.84 मिलियन मीट्रिक टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। परिचय भारत के पास नदियों, नहरों, बैकवॉटर और खाड़ियों के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों का एक व्यापक नेटवर्क है। ये मार्ग माल परिवहन के लिए किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साधन प्रदान करते हैं, क्योंकि इनमें ईंधन की खपत कम होती है और उत्सर्जन भी कम होता है। साथ ही, इन्हें न्यूनतम भूमि की आवश्यकता होती है और ये भारी एवं बड़े आकार वाले कार्गो को सुरक्षित रूप से ढो सकते हैं और संचालन में उच्च सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग व्यस्त सड़कों और रेलमार्गों पर दबाव कम करने में भी मदद करते हैं तथा रोल-ऑन/रोल-ऑफ (रो-रो) फेरी के माध्यम से वाहन परिवहन और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है, रखरखाव लागत कम रखता है और उन उद्योगों व उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो एक विश्वसनीय जलमार्ग नेटवर्क पर निर्भर हैं। इस क्षमता को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 में अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को संचालन में लाने की घोषणा की गई है। साथ ही, कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य सड़क और रेल से जल परिवहन की ओर माल ढुलाई को स्थानांतरित करना है। इस नीति का लक्ष्य 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग की संयुक्त हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है। इसी दिशा में, ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग-5 (एनडबल्यू-5) को विकसित किया जाएगा, जो तालचर और अंगुल जैसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों और पारादीप तथा धामरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। एनडबल्यू-5 के मार्ग पर क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक समर्पित जहाज मरम्मत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग और उसके नेटवर्क का विवरण अंतर्देशीय जलमार्ग की समझ अंतर्देशीय जलमार्ग वे नौवहन योग्य जल मार्ग होते हैं, जो किसी देश के भीतर स्थित होते हैं और समुद्र का हिस्सा नहीं होते। इनमें नदियां, नहरें, झीलें, लैगून और कुछ नदी मुहाने शामिल हैं। ये मार्ग प्राकृतिक या मानव-निर्मित विशेषताओं के कारण नौवहन के लिए उपयुक्त होते हैं और सामान्य परिस्थितियों में कम से कम 50 टन भार वहन करने वाले जहाजों के संचालन की अनुमति देते हैं। किसी नदी या झील को नौवहन योग्य तब माना जाता है, जब उसका उपयोग वाणिज्यिक परिवहन के लिए किया जा सके। ये मार्ग प्राकृतिक रूप से उपयुक्त हो सकते हैं या नहरों और अन्य सुधारों के माध्यम से विकसित किए जा सकते हैं। कुछ समुद्री प्रकृति के जलमार्ग और वे मार्ग, जिनका उपयोग मुख्यतः समुद्री जहाजों द्वारा किया जाता है, वे भी अंतर्देशीय जलमार्गों में शामिल किए जा सकते हैं। नदियों और नहरों की लंबाई मध्य प्रवाह (मिड-चैनल) के साथ मापी जाती है, जबकि झीलों और लैगून की लंबाई उस सबसे छोटे नौवहन योग्य मार्ग के आधार पर मापी जाती है, जिसका उपयोग परिवहन के लिए किया जाता है। नदी मुहानों को अंतर्देशीय जलमार्ग तब तक माना जाता है, जब तक समुद्र के निकटतम बिंदु पर नदी की चौड़ाई निम्न ज्वार पर तीन किमी से कम और उच्च ज्वार पर पांच किमी से कम हो।…
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खनन का असर दिखता है, DMF का लाभ क्यों नहीं?”—पौड़ी गढ़वाल की चुप्पी पौड़ी गढ़वाल में नदी-आधारित खनन कोई नई…