सीआईआरटी विशेषज्ञों की तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद परिवहन निगम प्रबंधन की ओर से टाटा कंपनी से खरीदी गई सभी नई बसों को कंपनी के पंतनगर प्लांट भेज दिया है। परिवहन निगम अधिकारियों के मुताबिक बसों की अंतिम खेप सोमवार को पंतनगर भेजी जाएगी। टाटा कंपनी की ओर से सभी बसों के गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव करने व विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट दोबारा मिलने के बाद ही इन बसों को लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कुछ माह पहले परिवहन निगम प्रबंधन ने टाटा कंपनी से 150 बसें खरीदी थी। कंपनी की ओर से दो माह पूर्व बसों की आपूर्ति भी कर दी गई। परिवहन विभाग में पंजीकरण कराने के साथ ही बसों को सड़कों पर भी उतार दिया गया लेकिन तमाम बसें उस समय विवादों के घेरे में आ गई जब चलती बसों के गियर लीवर टूटने लगे। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान ने बसों के संचालन पर रोक लगा दी थी।
साथ ही कंपनी को दिए जाने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय भुगतान पर भी रोक लगा दी थी। इसके बाद गियर लीवर की तकनीकी जांच करने की जिम्मेदारी सीआईआरटी पुणे के तकनीकी विशेषज्ञों को सौंप दी। सीआईआरटी के विशेषज्ञों की टीम ने बसों की जांच की और पाया कि गियर लीवर के डिजाइन में खामी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने गुणवत्ता पर भी तमाम सवाल उठाए। जांच के बाद सीआईआरटी की टीम ने 16 बिंदुओं पर अपनी जांच रिपोर्ट प्रबंधन को सौंपी। जिसमें सिफारिश की गई कि बसों को टाटा कंपनी को भेजकर गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव कराया जाए।
आखिरकार तकनीकी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही प्रबंध निदेशक ने सभी बसों को टाटा कंपनी को लौटाने का आदेश जारी कर दिया। निदेशक के आदेश पर ही सभी बसों को टाटा कंपनी को लौटा दिया गया है। अब टाटा कंपनी के तकनीकी विशेष बसों के नए डिजाइन तैयार करने की कवायद में जुट गए हैं। महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि गियर लीवर के डिजाइन में बदलाव करने के बाद तकनीकी टीम द्वारा नए सिरे से जांच किए जाने के बाद ही बसों को लिया जाएगा।
अशोक लेलैंड की बसों की जांच को जाएगी तकनीकी टीम
परिवहन निगम की ओर से गठित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जल्द ही अशोक लेलैंड बसों की जांच के लिए जाएगी। तकनीकी टीम के साथ कुछ विशेषज्ञ चालकों को भेजा जा रहा है, जो यह जांच करेंगे कि बसें निर्धारित मानकों अनुरूप हैं या नहीं? तकनीकी टीम की जांच रिपोर्ट के बाद बस खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
