सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक अब अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम बना रहा है जिससे वे अपने प्रतिद्धदी ऐपल के आईओएस और गूगल के एंड्रॉयड से अपनी निर्भरता को खत्म कर सके। मालूम हो कि इन्हीं दोनों कंपनियों के पास दुनिया के सबसे चर्चित ऑपरेटिंग सिस्टम हैं। फेसबुक ने इसकी जिम्मेदारी माइक्रोसॉफ्ट के लिए विंडोज-एनटी ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाले मार्क ल्यूकोवस्की को दी है।
फेसबुक हार्डवेयर के वाइस प्रेसिडेंट एंड्रयू बोसवर्थ का कहना है कि ‘हम ये साबित करना चाहते हैं कि हमारा अगला लक्ष्य अंतरिक्ष है’। हम दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहते हैं और सब कुछ खुद से करना चाहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार कैलिफोर्निया के बुर्लिनगेम फेसबुक 77 हजार स्कवॉयर फीट में नया कैंपस बना रहा है। इसमें 4 हजार कर्मचारी काम कर सकते हैं। रिपोर्ट में दावा है, कंपनी सिलिकॉन चिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस वॉइस असिस्टेंट बनाने में लगी है जिसका प्रयोग इस ऑपरेटिंग सिस्टम को तैयार करने में होगा।
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फेसबुक का ‘प्रोजेक्ट ऑक्सीजन’
फेसबुक ने इससे पहले खुद का मोबाइल फोन और सॉफ्टवेयर बनाया था लेकिन प्रोजेक्ट फेल हो गया था। इससे पहले उसने ‘प्रोजेक्ट ऑक्सीजन’ भी शुरू किया था जिसमें अगर उसके ऐप्स को गूगल प्ले-स्टोर में ब्लॉक कर देता है या इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देता है तो उपयोगकर्ता उसे कहीं और से ले सकते हैं।
2020 में हुवावे नए ओएएस के साथ
हुवई भी अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम ‘हार्मनी ओएस’ बनाने में लगा है। हुवई के प्रेसिडेंट वांग चेंगलु का कहना है कि कंपनी ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है और 2020 से अपने फोन में इसका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने ये भी कहा कि हार्मनी ओएस दुनियाभर में रहेगा लेकिन एंड्रॉयड को हटाया नहीं जाएगा। चेंगुल ने ये भी कहा कि अमेरिका ने गूगल की एंड्रायड सेवा के लिए इस्तेमाल पर हमारे लिए प्रतिबंध इसी तरह जारी रखा तो हम अपना ऑपरेटिंग सिस्टम ही प्रयेाग करेंगे।
