Government To Extend Subsidy For Food Processing Business Upto Rs 10 Lakh – फूड प्रोसेसिंग कपैसिटी बढ़ाने के लिए किसानों को 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी!
खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने 2 हजार करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा है। ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने पर
हाइलाइट्स:
- फल और सब्जियों के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव
- फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक, जारी संसद सत्र में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है
- इस स्कीम से किसानों, कुटीर उद्योगों, किसान संगठनों सहित अन्य लोगों को तरक्की करने का मौका मिलेगा,
- साथ ही देसी और वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी
सरकार किसानों को फल और सब्जियों के प्रसंस्करण की उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे सकती है। उन्हें खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ओर से 2 हजार करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना के तहत यह सहायता मिल सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया गया है। इस पर कैबिनेट की अनुमति की भी जरूरत होगी।
मौजूदा सत्र में प्रस्ताव पास होने की उम्मीदफूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने पहचान न जाहिर करने की शर्त पर बताया, ‘हमें उम्मीद है कि संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। इस कदम से गावों में छोटे उद्योगों को आधुनिक बनाने और फूड प्रोसेसिंग में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।’10 लाख रुपये तक की सरकारी मदद
अधिकारी ने बताया कि अगर इकाई का मालिक कर्ज लेता है तो ब्याज सब्सिडी के अलावा किसी यूनिट को योजना के तहत मिलने वाली राशि की ऊपरी सीमा 10 लाख रुपये होगी। उन्होंने कहा, ‘महिलाओं और उद्यमियों की ओर से चलाए जा रहे प्रॉजेक्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। फर्स्ट-टाइम आंट्रप्रन्योर को आसानी से कर्ज मिल जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए हम उन्हें बैंकों से भी जोड़ देंगे। अनाजों और मसालों जैसे कच्चे सामान के निर्यात के जरिए हम वैल्यू चेन में प्रोसेसिंग का लेवल बढ़ाना चाहते हैं। इससे हमें ज्यादा विदेशी मुद्रा मिलेगी और किसानों को अच्छा रिटर्न मिल सकेगा।’
देश में फूड प्रोसेसिंग बिजनस की बड़ी गुंजाइश
भारत दुनियाभर में फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। हालांकि उत्पादन के 10 प्रतिशत से कम की ही प्रोसेसिंग हो पाती है और जल्द खराब होने वाले खाद्य पदार्थ बड़ी मात्रा में बर्बाद हो जाते हैं। सरकार पिछले कुछ सालों में ऐसे खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश लाने पर ध्यान दे रही है।
इनके लिए सुनहरा मौका
अधिकारी का कहना है कि इस स्कीम से किसानों, कुटीर उद्योगों, किसान संगठनों सहित अन्य लोगों को तरक्की करने का मौका मिलेगा, साथ ही देसी और वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। योजना का मकसद ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना और किसानों की आय दोगुनी करना है। अधिकारी ने बताया, ‘छोटे और मझोले उद्योगों को पूंजी उपलब्ध कराने और उन्हें बढ़ावा देने से हम फार्म-टू-मार्केट लिंकेज बनाने में मदद करेंगे। इससे ग्रामीण भारत में फूड प्रोसेसिंग कपैसिटी बढ़ाने, टेक्नॉलजी अपग्रेड करने और फूड प्रॉडक्ट्स की नई रेंज लाने में भी मदद मिलेगी।’
