चारधाम सड़क को लेकर पर्यावरणविद रवि चोपड़ा की अध्यक्षता में बनी सर्वोच्च न्यायालय की उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने यह पाया है कि सड़क निर्माण से निकले मलबे के वैज्ञानिक रूप से प्रबंधन की अभी दरकार है। 24 अक्टूबर तक चारधाम सड़क के विस्तृत निरीक्षण में समिति ने यह भी महसूस किया कि इस तरह की बड़ी परियोजना के निर्माण में जल्दबाजी से काम लिया गया।
नवंबर में रिपोर्ट सौंप देगी समिति
चारधाम सड़क मार्ग के निर्माण में समिति ने पाया कि करीब-करीब सभी जगह मलबे की डंपिंग के लिए डंपिंग जोन बनाए गए हैं। इन डंपिंग जोन में सुरक्षा दीवार भी बनाई गई हैं। यह भी सामने आया कि कई क्षेत्रों में दीवार बहुत कमजोर थी या उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। खास बात यह भी है कि निर्माण कार्य से निकले मलबे को डंप करने के बाद उसके वैज्ञानिक रूप से उपचार करने की न के बराबर व्यवस्था की गई।
इतना जरूर है कि अन्य सड़क निर्माण मामलों की तरह इस सड़क के निर्माण से निकले मलबे को सीधे नदी में नहीं डाला जा रहा है। समिति ने यह भी पाया कि ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच सड़क चौड़ी की गई और ट्रक, डंपर आदि के लिए पार्किंग जोन भी बनाए गए। यह स्पष्ट नहीं है कि निर्माण के बाद इन पार्किंग जोन का क्या होगा? समिति अपनी तरफ से यह भी सुझाव दे सकती है कि चारधाम यात्रा के दौरान इस तरह के क्षेत्रों का उपयोग यातायात प्रबंधन के लिए किया जाए। समिति ने यह महसूस किया है कि सड़क निर्माण की इस परियोजना में जल्दबाजी की गई, जिससे कई जरूरी पहलुओं को पूरी तवज्जो नहीं मिल पाई।
