हरियाणा और पंजाब ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)के तहत बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले देश के शीर्ष पांच राज्यों में जगह बनाई है। इनके अलावा पहले के पांच राज्यों में असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली शामिल हैं।
बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश उन 14 राज्यों में शामिल हैं जिनका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। खराब प्रदर्शन करने पर एनएचएम के तहत प्रदर्शन पर आधारित केंद्र से मिलने वाली धनाराशि में इन राज्यों को नुकसान उठाना पड़ा है। साल 2018-19 के लिए जारी राज्यों की स्वास्थ्य प्रणाली से संबंधित रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
राज्यों के प्रदर्शन का जिन मानकों पर आकलन किया गया उनमें स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का संचालन (एचडब्ल्यूसी), एनएचएम कार्यक्रम के तहत शामिल जिलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रावधान और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (शहरी और ग्रामीण दोनों) की ग्रेडिंग शामिल है।
राज्यों में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रदर्शन पर नीति आयोग की रैंकिंग के मुताबिक वृद्धिशील सुधार प्रमुख शर्त है और इसे ही सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
आठ सशक्त कार्रवाई समूह (ईएजी) राज्यों में शामिल चार राज्यों को प्रोत्साहन राशि मिली, एक राज्य को कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिली और दो राज्यों पर जुर्माना लगा। सभी तीन पहाड़ी राज्यों-जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को शर्ते पूरी नहीं करने पर दंडित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर के आठ में से चार राज्य पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं कर सके। बाकी में से असम, त्रिपूरा और मणिपुर ने प्रोत्साहन हासिल किया। अन्य 11 राज्यों में से नौ ने प्रोत्साहन अर्जित किया, जबकि दो राज्यों पर जुर्माना लगा।
रिपोर्ट में अपने संदेश में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा है कि किसी भी प्रणाली में उत्पादकता प्रोत्साहन, दक्षता वृद्धि और विकास को गति देने के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन आजमाया हुआ तरीका है। इसी तर्क के साथ भारत में एनएचएम के तहत शर्तो को लागू किया गया था।
हर्षवर्धन ने कहा, ‘इसका उद्देश्य राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना और देश भर में बेहतर स्वास्थ्य परिणामों को प्रोत्साहित करना है। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए, हमने प्रदर्शन से जुड़ी शर्तो के लिए एनएचएम फंड को 10 से बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया है।’
20 राज्यों ने प्रोत्साहन अर्जित की
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018-19 में 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रोत्साहन अर्जित करने में सफल रहे। दो राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों ने तो प्रोत्साहन अर्जित की और न ही उन पर जुर्माना ही लगा जबकि शेष राज्यों पर जुर्माना लगा।
20 राज्यों ने प्रगति की
नीति आयोग के मानकों के अनुसार 36 में से 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रगति की है। जबकि, पिछले साल की तुलना में 16 राज्यों ने का प्रदर्शन खराब हुआ है।
