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केदारनाथधाम के लिए पैदल यात्रा मार्ग पर यात्री सुविधाओं को लेकर नजरें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड पर टिक गई हैं। पर्यटन विभाग ने केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में यात्री सुविधाएं विकसित करने को 0.895 हेक्टेयर वन भूमि उसे हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। राज्य वन्यजीव बोर्ड से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा जा रहा है। इस बारे में अंतिम फैसला राष्ट्रीय बोर्ड को ही करना है।

केदारनाथ का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार है। इसके तहत केदारपुरी एकदम नए कलेवर में निखर चुकी है। साथ ही अब केदारनाथ धाम के लिए पैदल मार्ग पर यात्री सुविधाओं के विकास पर फोकस किया जा रहा है। इसके तहत केदारनाथ यात्रा के पहले पड़ाव गौरीकुंड से लेकर केदारनाथधाम तक विभिन्न स्थानों पर यात्री सुविधाएं विकसित करने के लिए जिला पर्यटन विकास अधिकारी रुद्रप्रयाग ने वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है। असल में यह क्षेत्र केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत है। संरक्षित क्षेत्र में ऐसे मामलों में राज्य और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति लेना जरूरी होता है।

इसी कड़ी में हाल में हुई राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में वन भूमि हस्तांतरण के इस प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया गया। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक शासन ने इस संबंध में कसरत शुरू कर दी है। दो-तीन दिन में प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेज दिया जाएगा।

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केदारनाथ मार्ग पर ये होंगी सुविधाएं

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद पर्यटन विभाग केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ तक विभिन्न स्थानों पर प्रीफैब्रिकेटेड हट्स, टेंट कॉलोनी, किचन डाइनिंग व रिफ्रेशमेंट सेंटर तैयार करेगा। इन सुविधाओं के लिए ही पर्यटन विभाग ने 0.895 हेक्टेयर वन भूमि मांगी है।

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ये प्रस्ताव भी रा. वन्यजीव बोर्ड को

उत्तरकाशी जिले में हिमरी से पुजेली वन मार्ग व भग्यानधौला-मुसईपानी वन मार्ग पौड़ी जिले में पीएमजीएसवाई के तहत नौड़खाल माला-कोटा मार्ग, रुदप्रयाग में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक विद्युत लाइन के लिए वन भूमि हस्तांतरण, पौड़ी जिले में चीला-पशुलोक मार्ग पर गंगाभोगपुर में बीन नदी पर पुल का निर्माण, देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र के ढकरानी में रेत-बजरी व बोल्डर चुगान, हरिद्वार में रसूलपुर-मिट्ठीबेरी में उपखनिज चुगान और अल्मोड़ा जिले में झिरोली मैग्नीसाइट माइनिंग प्रोजेक्ट से संबंधित प्रस्ताव भी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजे जा रहे हैं। इन सभी प्रस्तावों को राज्य वन्यजीव बोर्ड अनुमोदित कर चुका है।


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By udaen

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