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त्रिशूल पर्वत की ट्रेकिंग पर गए जर्मनी के छह ट्रेकरों का दल हिमस्खलन होने के कारण एक दूसरे से बिछड़ गया है। दल की ढूंढखोज के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीम रवाना हो गई है। बताया जा रहा है कि इन विदेशी ट्रेकरों की ओर से त्रिशूल ट्रेक पर जाने के लिए वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

रविवार को रात 10.35 बजे तटरक्षक बल मुंबई की ओर से आपदा कंट्रोल रूम को त्रिशूल ट्रेक पर गए जर्मनी के छह ट्रेकरों के लापता होने की सूचना दी गई। कंट्रोल रूम की ओर से बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को सूचना दिए जाने के बाद वन विभाग ने ट्रेकरों के बारे में जानकारी जुटाई तो मालूम हुआ कि ट्रेकरों की ओर से ट्रेक पर जाने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

राज्य आपदा कंट्रोल रुम की सूचना पर सोमवार को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें घाट विकासखंड के सुतोल गांव से त्रिशूल ट्रेक के लिए रवाना हुई। चमोली जिले में पिछले दो दिनों से निचले क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है। त्रिशूल क्षेत्र में भी लगातार बर्फबारी हो रही है।

बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि जर्मनी के छह ट्रेकर त्रिशूल ट्रेक पर गए थे। दल में शामिल ट्रेकर निकोलस ची ने फोन से अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया समन्वय केंद्र को सूचना दी कि उनका साथी पीटर विट्टेक हिमस्खलन होने से उनसे बिछुड़ गया है।

आपदा कंट्रोल रूम से जानकारी मिली कि त्रिशूल ट्रेक पर एक विदेशी ट्रेकर मिसिंग चल रहा है। ट्रेकर की ढूंढखोज के लिए एनडीआरएफ की 10 सदस्यीय टीम त्रिशूल पर्वत की ओर रवाना हो गई है। त्रिशूल पर्वत पर कैंप कर ट्रेकर की ढूंढखोज की जाएगी।
-संदीप उपाध्याय, टीम प्रभारी, एनडीआरएफ, देहरादून 


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By udaen

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