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कंवलजीत कौर

”मैं किसी प्रायोजित अवॉर्ड समारोह में जाने से बेहतर अपने स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना ज़्यादा बेहतर समझती हूं.”

ये शब्द सरकारी अवॉर्ड लेने से इनकार करने वाली अमृतसर के छज्जलवड्डी इलाके की अध्यापिका के हैं.

कवंलजीत कौर गणित की अध्यापिका हैं और वो सरकारी कन्या हाईस्कूल में पढ़ाती हैं.

कंवलजीत कौर का नाम उन 2781 अध्यापकों में शामिल है जिन्होंने साल 2018-19 के दौरान 100 प्रतिशत रिजल्ट दिया और सरकार ने इन अध्यापकों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया.

कंवलजीत कौर ने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया, उनके पति जर्मनजीत सिंह ने भी उनके इस क़दम में भी उनका समर्थन किया है

कंवलजीत के पति भी अध्यापक ही हैं. कंवलजीत कौर ने इसे अपना निजी फै़सला बताया है, उन्होंने कहा कि वो दूसरे अध्यापकों के बारे में कुछ नहीं कह सकती हैं.

जब बीबीसी ने उनसे बात करने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि वो सिर्फ़ सुबह 7.30 बजे से पहले ही बात कर सकती हैं क्योंकि उसके बाद उनका स्कूल होता है.

अध्यापकों को मिले हक़

हर काम की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर डालना, कुछ अध्यापकों की सैलेरी 45-50 हज़ार से घटाकर 15 हज़ार करना, 10-10 हज़ार की सैलेरी वाले अध्यापकों को घरों से 200-250 किलोमीटर दूर भेजना और पटियाला संघर्ष के दौरान हुए लाठीचार्ज की घटना से कंवलजीत बेहद दुखी रही हैं.

उनका कहना है कि अध्यापकों को उनके हक़ मिलने चाहिए और सरकार को अध्यापकों की जायज़ मांगों को मानना चाहिए.

कंवलजीत कौर के मुताबिक, ”शिक्षा तंत्र को सुधारने के लिए उच्च अधिकारियों ने जो सलाह दी थीं वो पता नहीं कहां हैं, उन्हें लागू क्यों नहीं किया जाता.”

कंवलजीत कौर ने यह पत्र लिखा है.इमेज कॉपीरइटRAVINDER SINGH ROBIN/BBC
Image captionकंवलजीत कौर ने यह पत्र लिखा है.

अवॉर्ड ना लेने की वजह

कंवलजीत ने कहा, ”मैं शिक्षा क्षेत्र में होने वाले दिखावे से परेशान हो गई हूं. यहां हर रोज़ दिखावा होता है. स्कूल में छोटा-मोटा काम होता है तो उसकी फोटो खींचकर व्हाट्सऐप पर डाल दी जाती है. उस पर हमारी योग्यता तय होती है कि हमने क्या किया और क्या नहीं किया.”

”मैंने कभी व्हाट्सऐप पर फोटो नहीं डाली. दूसरा पिछले दिनों जो हमारे अध्यापकों के साथ पटियाला में हुआ, वह मैं आज तक नहीं भूल पाई हूं. मेरे मोबाइल में आज भी उस लाठीचार्ज की फोटो हैं, उन्हें देखकर आज भी मैं बहुत दुखी होती हूं.”

”एक अध्यापक, जो 45-50 हज़ार रुपए तन्ख्वाह ले रहा है उसे 15 हज़ार पर ले आए.”

किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार

कंवलजीत कौर कहती हैं, ”मुझे सरकारी नियमों पर ऐतराज़ है. पिछले दिनों जिस तरह का सुलूक सरकारी अध्यापकों के साथ हुआ है, उससे उनके सम्मान को ठेस पहुंची है. लोगों ने तरह- तरह की बात की, एक अध्यापक को नीचा दिखाने की कोशिश की गई है.”

कंवलजीत सवाल करती हैं कि आख़िर यह सम्मान किस बात के लिए दिया जा रहा है.

सम्मान ना लेकर वो सरकारी आदेश का उल्लंघन कर रही हैं. इस बात पर कंवलजीत कौर ने कहा कि अगर सम्मान ना लेना सरकारी आदेश का उल्लंघन है तो वो किसी भी तरह की कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं.

वो कहती हैं, ”2781 अध्यापकों को अमृतसर बुला लिया गया है. इस समय स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं. उन्हें कौन संचालित करवाएगा. जब हम सारे काम ऑनलाइन ही कर रहे हैं तो सम्मान पत्र भी उसी के ज़रिए भेज दिया जाए.”

कंवलजीत कहती हैं, ”स्कूल के प्रिंसिपल और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य अगर बच्चों के सामने अध्यापकों का सम्मान करते तो ज़्यादा बेहतर होता.

शिक्षकइमेज कॉपीरइटRAVINDER SINGH ROBIN / BBC

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा

पंजाब के शिक्षा मंत्री विजेंद्र सिंघला अध्यापकों के सम्मान समारोह में मौजूद थे. बीबीसी ने उनके सामने कंवलजीत कौर का मामला उठाया.

इस पर सिंघला ने कहा, ”सारा सिस्टम ठीक है, इसीलिए इन शिक्षकों का सम्मान भी हुआ है. जो अध्यापक सम्मान लेने आए थे उनके स्कूलों में भी बच्चों ने परीक्षाएं दी हैं. किसी एक अध्यापिका का सम्मान लेने ना आना उनका निजी फ़ैसला है.”

मैं भी समर्थन करता हूं

कंवलजीत कौर के पति जर्मनजीत सिंह ने कहा, ”आज के दौर में स्कूलों में जो भी ईमानदारी से पढ़ा रहा है, जो बच्चों की सही मायने में सेवा करना चाहता है, वह अध्यापक दुखी है. क्योंकि उसे पढ़ाने से दूर कर दिया गया है.”

उन्होंने कहा, ”आज शिक्षा को एक ड्रामा बना दिया गया है. शिक्षा एक दिखावा है. क्लास जाना, उसकी व्हाट्सऐप पर फोटो भेजना, बच्चे की एक्टिविटी की फोटो भेजना ये सब एक ड्रामा बनकर रह गया है.”

”इसलिए मेरी पत्नी ने सम्मान ना लेकर सही समय पर सही फै़सला लिया है, इसलिए मैं पूरी तरह से उनके साथ हूं.”


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By udaen

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