Spread the love

RTI कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज के सवालों से चुनाव आयोग की जवाबदेही पर चर्चा

NCPRI की सह-संयोजक लंबे समय से सूचना के अधिकार और पारदर्शिता के मुद्दों पर सक्रिय; SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली। सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता और नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इन्फॉर्मेशन (NCPRI) की सह-संयोजक एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को लेकर चर्चा में हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की निर्णय प्रक्रिया के संबंध में उनके द्वारा दायर सूचना के अधिकार आवेदन और आयोग के जवाब ने यह सवाल उठाया है कि इतने व्यापक अभियान के पीछे निर्णय लेने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेज कितने पारदर्शी हैं।

1999 से सूचना के अधिकार आंदोलन से जुड़ी हैं अंजलि भारद्वाज

अंजलि भारद्वाज देश में पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह NCPRI की सह-संयोजक और सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक सदस्य हैं। वह वर्ष 1999 से सूचना के अधिकार आंदोलन से जुड़ी रही हैं।

उनके काम का प्रमुख क्षेत्र सरकारी संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, लोकपाल व्यवस्था, शिकायत निवारण और नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार को प्रभावी बनाना रहा है। वह सूचना के अधिकार कानून, 2005 को प्रभावी बनाने के लिए चले आंदोलन से भी जुड़ी रही हैं।

सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली पर भी किया अध्ययन

अंजलि भारद्वाज ने सूचना आयोगों के कामकाज और RTI कानून के क्रियान्वयन का आकलन करने वाले अध्ययनों में योगदान दिया है। इनमें वर्ष 2011–13 में RTI व्यवस्था की निगरानी, वर्ष 2017 में सूचना आयोगों के निर्णयों का विश्लेषण और मार्च 2018 में सूचना आयोगों के कामकाज पर जारी रिपोर्ट शामिल हैं।

इन अध्ययनों में सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली और सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों को सामने लाने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में किन संस्थागत बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

SIR पर RTI आवेदन से उठा निर्णय प्रक्रिया का सवाल

अंजलि भारद्वाज ने 28 जुलाई 2025 को निर्वाचन आयोग से RTI के माध्यम से पूछा था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के पीछे कौन-से अध्ययन या विश्लेषण किए गए थे। उन्होंने संबंधित फाइलों, संदर्भ संख्याओं और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी भी मांगी थी।

27 सितंबर 2026 को प्रकाशित द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की ओर से जवाब दिया गया कि उसने वर्ष 2025 में देशभर में SIR शुरू करने का कोई निर्णय नहीं लिया था और इसलिए इस संबंध में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। जवाब में यह भी कहा गया कि संबंधित लोक सूचना अधिकारी के पास मांगी गई फाइलें भौतिक रूप में उपलब्ध नहीं थीं।

इस जवाब के बाद यह सवाल चर्चा में आया कि यदि व्यापक स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तो उससे संबंधित निर्णय और उसके आधार के दस्तावेज कहां उपलब्ध हैं।

हालांकि, इस जवाब को आयोग द्वारा कोई निर्णय नहीं लिए जाने का अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं होगा।

निर्वाचन आयोग ने क्या कहा?

26 सितंबर 2026 को निर्वाचन आयोग ने अपने बयान में कहा कि देशभर में SIR कराने का 24 जून 2025 का आदेश मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सर्वसम्मत स्वीकृति से जारी किया गया था।

आयोग ने यह भी कहा कि SIR से संबंधित उसके आदेशों को कानूनी आधार प्राप्त है। इस प्रकार, आयोग का सार्वजनिक स्पष्टीकरण और RTI के जवाब में सामने आई जानकारी निर्णय प्रक्रिया तथा दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग सवाल खड़े करते हैं।

इस मामले में निर्णय से संबंधित मूल फाइलों, आदेशों और आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण का अध्ययन जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दोनों के बीच दिखाई देने वाले अंतर का वास्तविक आधार क्या है।

2021 में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

अंजलि भारद्वाज को वर्ष 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से International Anti-Corruption Champions Award से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यक्तियों को दिया जाता है।

उनकी सक्रियता सूचना के अधिकार के अलावा लोकपाल, भ्रष्टाचार उजागर करने वालों की सुरक्षा और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दों से भी जुड़ी रही है।

लोकतंत्र में सूचना के अधिकार की भूमिका

अंजलि भारद्वाज का काम इस व्यापक सवाल से जुड़ा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी संस्थाएं अपने फैसलों के आधार और संबंधित दस्तावेजों के बारे में नागरिकों को किस हद तक जानकारी देती हैं।

RTI कानून नागरिकों और पत्रकारों को सरकारी कामकाज से संबंधित सूचनाएं मांगने का अधिकार देता है। वहीं, सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली और समय पर सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था इस अधिकार को प्रभावी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

SIR से जुड़ा प्रकरण इसी संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है। मतदाता सूची सीधे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ी होती है। इसलिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया, संबंधित नियमों और निर्णयों के दस्तावेजों की स्पष्टता सार्वजनिक विश्वास के लिए महत्त्वपूर्ण है।

निष्कर्ष: अंजलि भारद्वाज का सार्वजनिक रिकॉर्ड मुख्य रूप से RTI आंदोलन, सूचना आयोगों की निगरानी और सरकारी जवाबदेही से संबंधित है। SIR के मामले में उनके आवेदन ने निर्णय प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयान में इस प्रक्रिया को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया है। इन दोनों पक्षों के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए मूल दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।


समाचार स्रोत: द न्यूज मिनट, 27 सितंबर 2026; इंडिया टुडे, 26 सितंबर 2026; सतर्क नागरिक संगठन के सार्वजनिक दस्तावेज।


Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *