देहरादून घाटी में नदियों, नालों और नालों में हुए अतिक्रमण पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड की उच्च न्यायालय ने देहरादून के जिला मजिस्ट्रेट को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में तीन महीने का फैसला सुनाते हुए नाराजगी जताई। सरकार।
देहरादून निवासी पार्षद उर्मिला थापा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि लोगों ने देहरादून में रिस्पना, बिंदाल नदियों और नालों के साथ अतिक्रमण किया था। इस अतिक्रमण के कारण विभिन्न आबाद इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि लोगों ने नदियों के किनारे के क्षेत्रों से हजारों हरे पेड़ों को कुल्हाड़ी मार दी थी, जो आने वाले समय में स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा खतरा होगा।
यहाँ यह उल्लेख करना उचित है कि रिस्पना और बिंदाल दोनों नदियों के चैनल आवासीय और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए अतिक्रमण के कारण काफी कम हो गए हैं। राज्य सरकार अब तक ऐसे अतिक्रमणों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है, यहाँ तक कि नदियों के किनारे भी कई सरकारी भवनों का निर्माण किया गया था।
