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70 साल बाद अनुच्छेद 370 हटा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे

केंद्र ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि अनुच्छेद 370 लागू रहने तक राज्य का पुनर्गठन नहीं किया जा सकता था
अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है, संसद से पारित कई कानून इस राज्य में लागू नहीं हो पाते थे
केंद्र सरकार रक्षा, विदेश और संचार जैसे अहम विषयों को छोड़कर राज्य के बाकी मामलों में दखल नहीं दे सकती थी
अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य पुनर्गठन विधेयक पेश, जम्मू-कश्मीर अब दिल्ली की तरह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा
लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा, लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को अनुच्छेद 370हटा दिया।अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प पेश किया था।शाह के प्रस्ताव रखने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 के तहत अधिसूचना जारी कर दी।

70 साल पहले संविधान में जोड़ा गया था अनुच्छेद
26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने विलय संधि पर दस्तखत किए थे। उसी समय अनुच्छेद 370 की नींव पड़ गई थी, जब समझौते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था। 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया।

राज्य पुनर्गठन विधेयक पेश

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए सरकार ने सोमवार को राज्य पुनर्गठन विधेयक भी पेश किया। इसे बाद में पास कराया जाएगा। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा यानी यहां विधानसभा रहेगी। वहीं लद्दाख की स्थिति चंडीगढ़ की तरह होगी, जहां विधानसभा नहीं होगी।

राज्य में जंग जैसे हालात- गुलाम नबी

जबराज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए।आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है।

पीडीपी सांसदने सदन में कपड़े फाड़े

चर्चा के दौरान पीडीपी के सांसद मीर फैयाज और नजीर अहमद लावे संविधान का उल्लंघन कर रहे थे, जिसके चलते नायडू ने दोनों को सदन से बाहर जाने को कहा। इन सांसदों ने संविधान की प्रति भी फाड़ी।गुलाम नबी ने कहा कि पीडीपी के सांसदों द्वारा किए गए काम की निंदा करता हूं। हम भारत के संविधान के साथ हैं। हम संविधान की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा देंगे। लेकिन भाजपा ने आज संविधान की हत्या कर दी।

शाह ने कहा- अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को 3 परिवार लूट रहे थे। आजाद ने कहा कि अनुच्छेद 370 भारत को जम्मू-कश्मीर से जोड़ता है, यह सही नहीं है। महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर 27 अक्टूबर 1947 पर दस्तखत किए थे। अनुच्छेद 370 1954 में अस्तित्व में आया

संसद पहुंचने पर मुस्कुराए थे शाह

संसद भवन पहुंचने पर पत्रकारों नेशाह से कश्मीर परबड़े फैसले को लेकर सवाल पूछा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुरा कर अंदर चले गए। कांग्रेस ने दोनों सदनों में स्थगन नोटिस दिया और कार्यवाही से पहले गुलाम नबी आजाद के चेंबर में बैठक की।

जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक भी पेश होगा

गृह मंत्रीराज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पिछड़े वर्गों काे 10% आरक्षण संबंधी बिल भी पेश करेंगे। यह बिल 28 जून में लोकसभा से पास हो चुका है। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल 2019 में कश्मीर में सीमा से सटे इलाकों के नागरिकों को विशेष आरक्षण देने का प्रावधान किया है। ताकि उन्हें भी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर बराबरी का मौका मिल सके। शाह ने लोकसभा में कहा था कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को शेल्टर होम में रहना पढ़ता है। कई दिनों तक बच्चों को यहां रहना पड़ता है। स्कूल बंद रहते हैं। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है। इससे साढ़े तीन लाख लोगों को फायदा होगा।

जम्मू-कश्मीर के हर वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलेगा
गृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए बिल के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया है। राज्यसभा में बिल पास होने से अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। आरक्षण नियम में संशोधन कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।

 


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By udaen

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