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प्रविष्टि तिथि: 08 OCT 2026 8:18PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को 01.04.2026 से 30.09.2026 की अवधि के दौरान भारत के जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यह राशि जैविक विविधता अधिनियम, 2002 और 2023 में संशोधित तथा एबीएस विनियमों के अनुसार प्राप्त हुई। कुल प्राप्तियों में से 9.56 करोड़ रुपए जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त हुए, जिनका विवरण नीचे दिया गया है।

क्षेत्रवार अंशदान

कृषि बीज क्षेत्र से सबसे अधिक 7.16 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र से 1.59 करोड़ रुपए और पशुपालन क्षेत्र से 62.01 लाख रुपए की आय हुई। आईपीआर संबंधी आवेदनों के अंतर्गत वर्गीकृत राशि 11.24 लाख रुपए रही। अन्य राशि आयुष, लाल चंदन, सौंदर्य प्रसाधन आदि क्षेत्रों से प्राप्त हुई।

क्षेत्रएबीएस की प्राप्तियां (करोड़ में)
कृषि7.16
खाद्य एवं पेय पदार्थ1.59
पशुपालन0.62
आयुष0.21
लाल चंदन0.06
सौंदर्य प्रसाधन0.04
कुल9.68 करोड़

प्रमुख अंशदान

एबीएस में सबसे अधिक अंशदान मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड का था, जिसने कई भुगतानों में लगभग 2.01 करोड़ रुपए का अंशदान दिया। सबसे बड़ा एकल एबीएस भुगतान मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड द्वारा 1.17 करोड़ रुपए का था। एबीएस में अन्य महत्वपूर्ण अंशदाताओं में मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (52.06 लाख रुपए), मैसर्स इंडेना इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (45.89 लाख रुपए), मैसर्स ग्रो इंडिगो लिमिटेड (45.79 लाख रुपए), मैसर्स नोवोजाइम्स साउथ एशिया (44.11 लाख रुपए) और मैसर्स नोंगवू सीड इंडिया (40.53 लाख रुपए) शामिल थे।

मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड ने लगभग 1.64 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान किया। इसमें श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया गणतंत्र और भूटान सहित घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अंशदान प्राप्त हुआ।

जैविक संसाधनों की विविधता

इन प्राप्तियों से कृषि, खाद्य, औषधियां, जैव प्रौद्योगिकी, औषधीय पौधे, सूक्ष्मजीव और पशुधन सहित विभिन्न प्रकार के जैविक संसाधनों के उपयोग का पता चलता है। इनमें चना, लाल मसूर, हरी मूंग, कुलथी, अलसी, ग्वार गोंद, साबूदाना, कुट्टू, ब्राऊन राइस, फूलगोभी, भिंडी, लाल मिर्च, बैंगन और तोरी जैसी कृषि फसलें शामिल हैं।

जैविक संसाधनों में अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, वासाका, मुलेठी, अर्जुन, ब्राह्मी, गोटूकोला और मोरिंगा जैसे औषधीय पौधों के साथ ही एज़ोस्पिरिलम, एज़ोटोबैक्टर, बैसिलस, राइज़ोबियम, ट्राइकोडर्मा और मेटारहिज़ियम जैसे मृदा सूक्ष्मजीव शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें मिथुन (बोस फ्रंटालिस), जर्सी गाय (बोस टॉरस) और मुर्रा भैंस (बुबालस बुबालिस) के जमे हुए वीर्य जैसे पशुधन आनुवंशिक संसाधनों के साथ ही खेती से प्राप्त और नीलाम की गई लाल चंदन की लकड़ी भी शामिल है।

जैव विविधता संरक्षण के साथ लाभ साझाकरण को जोड़ना

2008 से, एनबीए ने एबीएस के माध्यम से लगभग 278 करोड़ रुपए जुटाए हैं और जैव विविधता संरक्षण तथा देश भर में समुदायों, किसानों, संस्थानों और अन्य लाभ चाहने वालों के लिए 200 करोड़ रुपए से अधिक का वितरण किया है।

एबीएस तंत्र केवल धन संग्रहण से कहीं अधिक व्यापक है, यह जैविक संसाधनों के उपयोग को जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों के समान वितरण से जोड़ता है। राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के माध्यम से वितरित धनराशि से  जैविक संसाधनों के संरक्षण, जन जैव विविधता रजिस्टरों की तैयार करने और उनके अद्यतन, जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सुदृढ़ करने, जैव विविधता अनुसंधान और दस्‍तावेजीकरण तथा स्थानीय समुदायों और अन्य लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने में मदद की जाती है। 

एबीएस तंत्र एक ऐसा ढांचा प्रदान करता है, जिसके माध्यम से भारत धीरे-धीरे अपनी जैविक विविधता के उपयोग को जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग और स्थानीय समुदायों के लाभ के लिए ठोस परिणामों में बदल रहा है। इस अवधि के दौरान प्राप्त आय भारत के एबीएस ढांचे के निरंतर कार्यान्वयन और जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं द्वारा लाभ-साझाकरण दायित्वों को पूरा करने को दर्शाती है।


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By udaen

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