लखनऊ। दिव्यांगजनों के अधिकारों और विभिन्न मांगों को लेकर किए गए प्रदर्शन का असर सामने आया है। प्रदर्शन के बाद दिव्यांगजनों के लिए स्मार्ट मीटर के साथ निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने तथा दिव्यांगजनों को राशन की दुकानों के आवंटन के संबंध में आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित स्तर पर पत्र जारी किया गया है।

दिव्यांग अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे लोगों ने इसे अपनी एकजुटता, लोकतांत्रिक संघर्ष और लगातार उठाई गई आवाज की महत्वपूर्ण जीत बताया है। उनका कहना है कि जब दिव्यांगजन अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो शासन-प्रशासन को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना पड़ता है।

उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था में स्मार्ट मीटर को लेकर पहले से ही कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा चुके हैं। राज्य में स्मार्ट मीटर संबंधी व्यवस्था और उपभोक्ता सुविधाओं को लेकर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से भी लगातार सूचनाएं जारी की जा रही हैं।
इसी बीच दिव्यांगजनों की ओर से निःशुल्क बिजली की सुविधा, स्मार्ट मीटर के साथ आवश्यक व्यवस्था तथा राशन की दुकानों के आवंटन में अवसर जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के लिए पत्र जारी होना आंदोलनकारियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पत्र जारी होना संघर्ष की पहली सफलता है, लेकिन वास्तविक सफलता तब होगी जब संबंधित विभाग इन निर्देशों को धरातल पर लागू करेंगे और पात्र दिव्यांगजनों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
राशन की दुकानों में अवसर की मांग
दिव्यांगजनों को राशन की दुकानों के आवंटन से जोड़ने की मांग को आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में उचित दर की दुकानों के माध्यम से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन वितरण की व्यवस्था संचालित होती है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं का केवल लाभार्थी मानने के बजाय उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
“हम सही हैं तो जीत हमारी होगी”
प्रदर्शन से जुड़े दिव्यांगजनों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने कानूनी और सामाजिक अधिकारों के लिए है।
उनका संदेश है—“हम सही हैं तो जीत हमारी होगी।”
उन्होंने कहा कि पत्र जारी होने के बाद भी संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। अब उनकी प्राथमिकता संबंधित आदेशों और पत्रों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराना है।
दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि दिव्यांगजनों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध कार्रवाई की जाए और जारी पत्रों को केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए।
दिव्यांगजनों का कहना है कि अधिकार मांगने से नहीं, बल्कि जागरूकता, एकजुटता और लोकतांत्रिक संघर्ष से मजबूत होते हैं। प्रदर्शन के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई इसी संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
