
कोटद्वार। नगर निगम कोटद्वार क्षेत्र में संचालित चार प्रमुख साप्ताहिक हाट-बाजारों की भूमि के स्वामित्व और सीमांकन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्रवाई शुरू हो गई है। नगर निगम और पुलिस के बीच हुए आधिकारिक पत्राचार से संकेत मिलता है कि इन बाजारों की भूमि की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व विभाग से विस्तृत अभिलेख मांगे गए हैं।

नगर निगम द्वारा 19 जून 2026 को उपजिलाधिकारी, कोटद्वार को भेजे गए पत्र में चार साप्ताहिक हाट-बाजारों की भूमि का स्वामित्व, खसरा विवरण, चौहद्दी (सीमांकन) और अन्य राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद 1 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने भी नगर आयुक्त को पत्र भेजकर जनसुरक्षा के दृष्टिकोण से किए गए निरीक्षण का उल्लेख करते हुए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया।
किन बाजारों की हो रही जांच
पत्रों में जिन बाजारों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- वार्ड 38 – झण्डीचौड़ उत्तरी (प्रत्येक बुधवार)
- वार्ड 36 – लोकमणिपुर/अम्बेडकर पार्क (प्रत्येक शनिवार)
- वार्ड 40 – जशोधरपुर (प्रत्येक शुक्रवार)
- वार्ड 37 – झण्डीचौड़ पूर्वी (प्रत्येक रविवार)
ये सभी बाजार वर्षों से स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
पुलिस निरीक्षण में क्या सामने आया
पुलिस द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान यह जानकारी सामने आई कि कुछ स्थानों पर निगम अथवा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने की संभावना है। वहीं अम्बेडकर पार्क स्थित हाट-बाजार की भूमि का स्वामित्व भी स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता बताई गई।
इसी आधार पर नगर निगम ने राजस्व विभाग से भूमि संबंधी सभी अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके।
नगर निगम ने क्या मांगा
नगर निगम ने राजस्व अधिकारियों से निम्न जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है—
- भूमि स्वामी का नाम
- खसरा संख्या एवं विवरण
- चौहद्दी (सीमांकन)
- भूमि का वास्तविक स्वामित्व
- संबंधित राजस्व अभिलेख
नगर निगम का कहना है कि इन अभिलेखों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल बाजार बंद करने का आदेश नहीं
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार अभी तक किसी भी साप्ताहिक हाट-बाजार को बंद करने या हटाने का आदेश जारी नहीं किया गया है। वर्तमान कार्रवाई केवल भूमि की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने और सीमांकन कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
आगे क्या हो सकता है
यदि राजस्व अभिलेखों में यह स्पष्ट होता है कि संबंधित भूमि सरकारी या नगर निगम की है और उस पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण है, तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। दूसरी ओर यदि भूमि का स्वामित्व स्पष्ट और वैध पाया जाता है, तो बाजारों के संचालन को लेकर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
स्थानीय व्यापारियों की नजर
चारों साप्ताहिक हाट-बाजारों में बड़ी संख्या में छोटे व्यापारी, ग्रामीण विक्रेता और किसान अपनी उपज एवं वस्तुओं की बिक्री करते हैं। ऐसे में भूमि संबंधी जांच का सीधा प्रभाव इन बाजारों से जुड़े हजारों लोगों पर पड़ सकता है। इसलिए व्यापारी अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और राजस्व विभाग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण: उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रशासन ने भूमि स्वामित्व एवं सीमांकन की जांच प्रक्रिया शुरू की है। इन दस्तावेजों से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा अतिक्रमण सिद्ध हो चुका है या बाजारों को हटाने का निर्णय लिया गया है। ऐसी किसी कार्रवाई के लिए राजस्व जांच और सक्षम प्राधिकारी के आदेश आवश्यक होंगे।
