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वन-उत्पाद आधारित सहकारी समितियां

PIB Delhi

सरकार झारखंड और गुजरात के जनजातीय जिलों सहित जनजातीय क्षेत्रों में लघु वन उत्पाद, हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और अन्य आजीविका कार्यकलापों में लगी सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा दे रही है । राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 जनजातीय समुदायों सहित कमजोर और सीमांत वर्गों की सहकारी समितियों को सशक्त करने और लघु वन उत्पाद के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने पर बल देती है।

राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को मौजूदा वन उत्पाद समितियों को सशक्त करने और जहां उपयुक्त हो, उन्हें लागू राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियमों और स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुसार बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का उपयोग सहकारी कवरेज में कमी की पहचान करने और जिला-वार आयोजना को सुविधाजनक बनाने के लिए भी किया जा रहा है।

इसके अलावा, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (ट्राइफेड) उन जिलों में लघु वन उत्पादों (एमएफपी) के संग्रहण और बिक्री के लिए वन धन कार्यक्रम के कार्यान्वयन का नेतृत्व करता है, जिनमें मुख्य रूप से वनवासी जनजातीय आबादी है। इस कार्यक्रम के तहत, जनजातीय जिलों में आदिवासी समुदाय के स्वामित्व वाले वन धन विकास केंद्र क्लस्टर (वीडीवीकेसी) स्थापित किए जाते हैं। इस प्रयोजन के लिए, सरकार द्वारा एसएचजी/वन धन केंद्रों के रूप में समूहों को 100% सहायता प्रदान की जाती है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों की योजनाओं के अंतर्गत पात्र सहकारी समितियों द्वारा लागू योजना दिशा-निर्देशों और परियोजना प्रस्तावों के अनुमोदन की शर्त पर वित्तीय सहायता प्राप्त की जा सकती है ।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। विभिन्न सहकारी क्षेत्रों में अपने समग्र कार्यक्रमों के तहत, एनसीडीसी ने इसी अवधि के दौरान झारखंड में 44.40 करोड़ रुपये और गुजरात में 2,302.22 करोड़ रुपये संवितरित किए।

सहकारी संस्थाओं के माध्यम से जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे उपायों में निम्नलिखित शामिल है:

  1. लघु वन उपज और स्थानीय रूप से उपलब्ध अन्य उत्पादों के एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा देना;
  2. सहकारी समितियों को कॉमन सेवा केंद्रों, निविष्टि आपूर्ति, भंडारण, प्रसंस्करण और अन्य ग्रामीण सेवाओं सहित आदर्श उप-विधियों के तहत विविध कार्यकलापों को शुरू करने में सक्षम बनाना;
  3. राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड जैसी राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों के माध्यम से बाजार संपर्क की सुविधा प्रदान करना;
  4. पारदर्शिता, प्रचालन दक्षता और सेवाओं तक पहुंच में सुधार के लिए पैक्स का कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण; तथा
  5. वर्ष 2023 में यथा संशोधित बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी के बोर्डों में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व।
  6. जनजातीय परिवारों की आय में वृद्धि हेतु सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बाजार संपर्क सुदृढ़ करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL) जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी समितियों सहित सहकारी संस्थाओं के अधिशेष उत्पादों के निर्यात के लिए एक संस्थागत मंच उपलब्ध कराता है। नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) “भारत ऑर्गेनिक्स” ब्रांड के अंतर्गत जैविक उत्पादों के एकत्रीकरण, जैविक प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग तथा विपणन को सहयोग प्रदान करता है।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।


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By udaen

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