चुनाव आयोग ने मीडिया एवं संचार अधिकारियों को दिया तथ्य आधारित संवाद का मंत्र
नई दिल्ली, 12 जून। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देशभर के मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मीडिया नोडल अधिकारी (MNO), सोशल मीडिया नोडल अधिकारी (SMNO) तथा जिला जनसंपर्क अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य चुनावी संचार को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना था।
सम्मेलन में 350 से अधिक अधिकारियों की भागीदारी रही। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के पांच राज्यों के चुनावों में स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक जनभागीदारी देखने को मिली है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि जनता तक पहुंचने वाली हर सूचना समयबद्ध, तथ्यात्मक और कानून आधारित होनी चाहिए।
चुनाव आयुक्त Sukhbir Singh Sandhu ने कहा कि संचार का मूल्यांकन केवल सूचना प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक प्रभाव से होना चाहिए। वहीं चुनाव आयुक्त Vivek Joshi ने आयोग के नियमों, निर्देशों और दिशा-निर्देशों को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर विशेष फोकस
सम्मेलन में चुनावी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण—मतदाता सूची से लेकर मतदान और परिणाम तक—संचार रणनीतियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग, प्रेस नोट तैयार करने, चुनाव आयोग की पहलों के प्रचार-प्रसार तथा भ्रामक सूचनाओं और दुष्प्रचार (Misinformation) से निपटने के व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए गए।
विशेष रूप से युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने, मतदाता जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोग की विश्वसनीय उपस्थिति सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान
सम्मेलन में हाल ही में चुनाव सम्पन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और सफल संचार मॉडल प्रस्तुत किए। इससे विभिन्न राज्यों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को साझा करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का समापन मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें अधिकारियों ने चुनावी संचार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने प्रश्न रखे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
आज के डिजिटल युग में चुनाव केवल मतदान प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली अफवाहें, फर्जी खबरें और दुष्प्रचार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग का यह प्रयास चुनावी सूचना तंत्र को अधिक विश्वसनीय, तथ्यपरक और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु:
- 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल।
- 350 से अधिक मीडिया एवं संचार अधिकारियों की भागीदारी।
- फेक न्यूज और दुष्प्रचार से निपटने पर विशेष प्रशिक्षण।
- चुनावी संचार को तथ्य, कानून और प्रभाव आधारित बनाने पर जोर।
- राज्यों के सफल अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा मंच।
