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उत्तराखण्ड रेरा में बड़े सुधारों की तैयारी, अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर होगी सख्त निगरानी

देहरादून, 13 जून। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधारों की तैयारी शुरू हो गई है। सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति Dr. R. Rajesh Kumar की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में रेरा की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जनहितैषी बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में निर्णय लिया गया कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, असम और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में लागू रेरा व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन कर उत्तराखण्ड के लिए सर्वोत्तम मॉडल अपनाया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सुधारों का रोडमैप बनाया जाएगा।

सचिव आवास ने रेरा के ऑनलाइन पोर्टल को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रणाली से एकीकृत करने का सुझाव दिया, जिससे परियोजनाओं के पंजीकरण और अनुमोदन की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। उन्होंने यह भी प्रस्तावित किया कि रेरा पंजीकरण प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि स्वीकृत मानचित्र में किसी भी प्रकार के बदलाव से पहले परियोजना के कम से कम दो-तिहाई आवंटियों की सहमति अनिवार्य होगी।

बैठक में बिल्डर एवं प्रमोटर पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रमोटरों की पूर्व परियोजनाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खरीदारों को डेवलपर के ट्रैक रिकॉर्ड की जानकारी मिल सकेगी।

राज्य में बढ़ रही अवैध प्लॉटिंग और बिना स्वीकृति के निर्माण गतिविधियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि विकास प्राधिकरणों द्वारा सीलिंग, ध्वस्तीकरण अथवा अन्य कार्रवाई वाले मामलों की सूचना रेरा को भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि खरीदारों को जोखिम वाली परियोजनाओं की जानकारी समय पर मिल सके।

रेरा के प्रभारी अध्यक्ष Naresh Mathpal ने बताया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल अथवा आठ से अधिक निर्मित इकाइयों वाली सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए विज्ञापन, बुकिंग, आवंटन एवं विक्रय से पूर्व रेरा में पंजीकरण अनिवार्य है। परियोजना और एजेंट पंजीकरण आवेदनों के निस्तारण के लिए 30 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में गठन के बाद से राज्य में 689 रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं। हिमालयी राज्यों में परियोजना पंजीकरण के मामले में उत्तराखण्ड दूसरे स्थान पर है, जबकि 510 पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के साथ राज्य पहले स्थान पर है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि रेरा को अब तक 1342 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 86 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। वहीं सीएम हेल्पलाइन और सीपीग्राम्स के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का शत-प्रतिशत निस्तारण किया गया है।

समीक्षा बैठक में बैंक अकाउंट डायरेक्शन-2025 के क्रियान्वयन की जानकारी भी दी गई। इसके तहत प्रत्येक रियल एस्टेट परियोजना के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते संचालित किए जाने का प्रावधान है, जिससे परियोजना निधियों की निगरानी और वित्तीय अनुशासन को और मजबूत बनाया जा सके।

बैठक में संयुक्त सचिव आवास श्री धीरेंद्र कुमार सिंह, अनु सचिव श्री नरेंद्र सिंह रावत, अनुभाग अधिकारी श्री राहुल सुन्दरियाल, सदस्य श्री पंकज कुलश्रेष्ठ, सहायक अभियंता श्री आनंद शंकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


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By udaen

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