अभिभावकों को सशक्त बनाने की पहल: AYJNISHD(D) में आयोजित हुआ पैरेंट एम्पावरमेंट प्रोग्राम
मुंबई, 1 जून। बच्चों के विकास और पुनर्वास की प्रक्रिया में परिवार की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगजन संस्थान (AYJNISHD(D)), मुंबई के मनोविज्ञान विभाग द्वारा 29 मई 2026 को एक विशेष पैरेंट एम्पावरमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चले इस कार्यक्रम में लगभग 20 अभिभावकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा विभाग की रीडर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. गायत्री आहूजा के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास में परिवार की भागीदारी केवल सहयोगी नहीं बल्कि निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनके विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने पर बल दिया।
सत्र का संचालन मनोविज्ञान विभाग के मनोवैज्ञानिक राजकुमार कोली ने किया। उन्होंने अभिभावकों को प्रभावी पालन-पोषण, बच्चों के व्यवहार को समझने, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास प्रक्रिया में परिवार की सक्रिय भागीदारी उनके आत्मविश्वास, सामाजिक कौशल और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को यह समझाया कि दिव्यांग बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान केवल संस्थागत सेवाओं से नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय के सहयोग से भी संभव है। सकारात्मक संवाद, धैर्य, प्रोत्साहन और नियमित सहभागिता बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा किए और बच्चों के व्यवहार, शिक्षा तथा दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की। इस संवादात्मक सत्र ने अभिभावकों को अपनी चिंताओं के समाधान के साथ-साथ अन्य परिवारों के अनुभवों से सीखने का अवसर भी प्रदान किया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत संचालित AYJNISHD(D) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम समावेशी शिक्षा, परिवार-केंद्रित पुनर्वास और दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अभिभावकों को आवश्यक जानकारी, मनोवैज्ञानिक सहयोग और व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने बच्चों के विकास में अधिक प्रभावी भागीदार बन सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब परिवार, विद्यालय और पुनर्वास संस्थान मिलकर कार्य करते हैं, तब दिव्यांग बच्चों के लिए बेहतर और अधिक समावेशी भविष्य का निर्माण संभव हो पाता है।
