चारधाम यात्रा के बीच जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर सरकार सख्त, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के चरम दौर और बढ़ती उपभोक्ता मांग के बीच मुख्य सचिव ने खाद्यान्न एवं दैनिक आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता तथा मूल्य नियंत्रण को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा की। सचिवालय में आयोजित बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेशभर की स्थिति का आकलन किया गया।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने आयुक्त खाद्य से प्रदेश में खाद्यान्न, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल तथा अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं उचित दरों पर निर्बाध रूप से उपलब्ध रहें और इसके लिए नियमित निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि बाजार में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी, जमाखोरी या कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को बाजारों, गोदामों और थोक विक्रेताओं के यहां लगातार निरीक्षण अभियान चलाने तथा अनियमितता मिलने पर तत्काल सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
विशेष रूप से चारधाम यात्रा से जुड़े जिलों में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यात्रा सीजन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए आपूर्ति श्रृंखला बाधित नहीं होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने दोहराया कि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने और बाजार व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर , रीजनल मार्केटिंग ऑफिसर तथा उपायुक्त सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
संपादकीय दृष्टि
चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड में खाद्यान्न, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में जमाखोरी और कृत्रिम मूल्यवृद्धि की आशंकाएं भी बढ़ती हैं। मुख्य सचिव की यह समीक्षा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और बाजार व्यवस्था को नियंत्रित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चुनौती अब इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की है, ताकि आम नागरिक और यात्री दोनों अनावश्यक आर्थिक बोझ से बच सकें।
