नेपाल की राजनीति में इस समय जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है । एक समय टेलीविजन पत्रकारिता के जरिए जनता की आवाज उठाने वाले लामिछाने आज देश की सत्ता के केंद्र में खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनकी पार्टी (राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी) ने हालिया चुनाव में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को गहरे तक झकझोर दिया है।
पत्रकारिता से जननेता तक का सफर
रवि लामिछाने ने अपनी पहचान पहले एक लोकप्रिय टेलीविजन पत्रकार के रूप में बनाई। उनका कार्यक्रम “सिधा कुरा जनतासँग” नेपाल में काफी चर्चित रहा, जिसमें वे भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और आम लोगों की समस्याओं को सीधे तौर पर उठाते थे। इसी कार्यक्रम ने उन्हें आम जनता के बीच एक निर्भीक और मुखर आवाज के रूप में स्थापित किया।
पत्रकारिता के इसी अनुभव और जनसमर्थन के आधार पर उन्होंने 2022 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की। उस समय इसे नेपाल की राजनीति में एक नए प्रयोग के रूप में देखा गया था, लेकिन कम समय में ही यह पार्टी देश की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हो गई।
पहली ही पारी में सत्ता की दहलीज
पार्टी के गठन के कुछ ही समय बाद हुए चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को अप्रत्याशित सफलता मिली। सीमित संसदीय सीटों के बावजूद रवि लामिछाने सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सफल रहे और उपप्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि नेपाल की जनता पारंपरिक दलों के विकल्प की तलाश कर रही है।
नई राजनीति की उम्मीद
हालिया चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को मिले भारी समर्थन ने नेपाल की राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाले दलों—जैसे और —को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है। यह परिणाम इस बात का संकेत है कि जनता अब नई राजनीतिक संस्कृति और जवाबदेही की मांग कर रही है।
बालेन शाह का समीकरण
चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने युवा नेता को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाकर पेश किया था। बालेन शाह पहले ही के मेयर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं और युवाओं के बीच उनका प्रभाव भी काफी मजबूत है।
लेकिन चुनाव के बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी बालेन शाह को दी जाएगी या फिर पार्टी संस्थापक रवि लामिछाने स्वयं यह भूमिका निभाएंगे।
नई राजनीति की कसौटी
रवि लामिछाने के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे उस भरोसे को कायम रख सकें जो जनता ने उनकी पार्टी पर जताया है। नेपाल की राजनीति में लंबे समय से अस्थिरता, भ्रष्टाचार और दलगत संघर्ष के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के लिए यह अवसर भी है और परीक्षा भी कि वह सत्ता में आने के बाद अपने वादों को किस तरह निभाती है।
रवि लामिछाने की राजनीतिक यात्रा इस बात का उदाहरण है कि जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता कभी-कभी सीधे सत्ता के गलियारों तक भी पहुंचा सकती है। अब देखना यह होगा कि पत्रकारिता से शुरू हुई यह राजनीतिक पारी नेपाल की शासन व्यवस्था में कितना स्थायी बदलाव ला पाती है।
