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कोटद्वार | 31 जनवरी 2026

सुबह की हल्की धूप, खोह नदी के किनारे चहचहाते पक्षी और हजारों लोगों की मौजूदगी—कोटद्वार का सनेह क्षेत्र शनिवार को सिर्फ एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति और विकास के संवाद का मंच बन गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों शुरू हुआ दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल केवल पक्षियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कोटद्वार को उत्तराखण्ड के उभरते इको-टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने का संकेत दे दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मानवीय संवेदना से हुई। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले दिव्यांग बच्चों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इसके बाद सिद्धबली मंदिर में पूजा-अर्चना और फिर सीधे उस आयोजन में पहुँचे, जहाँ प्रकृति ही नायक थी।

जैसे ही मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पहुँचे, गढ़वाली लोकभाषा में स्वागत गीत और नन्हे बच्चों की पक्षी संरक्षण पर प्रस्तुति ने माहौल को भावुक और जीवंत बना दिया। कैमरों की फ्लैश से ज्यादा चमक बच्चों की आँखों और पक्षियों की तस्वीरों में थी।

326 करोड़ की सौगात, लेकिन संदेश उससे बड़ा

मंच से मुख्यमंत्री ने 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया—कुल लागत 326 करोड़ रुपये से अधिक
बस टर्मिनल, आयुष अस्पताल, नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने की योजना, पुल, फोरलेन सड़कें—ये सब विकास के ठोस संकेत हैं।
लेकिन मुख्यमंत्री के भाषण का असली केंद्र रहा पर्यावरण और संतुलन

उन्होंने कहा,

“पक्षी केवल सुंदर दृश्य नहीं हैं, वे प्रकृति का संतुलन हैं। अगर पक्षी सुरक्षित हैं, तो भविष्य सुरक्षित है।”

महिलाएँ, युवा और स्थानीय उत्पाद बने आकर्षण

फेस्टिवल परिसर में लगे स्वयं सहायता समूहों के स्टॉल किसी मेले जैसे नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की झलक थे।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं के उत्पादों की तारीफ करते हुए कहा कि गुणवत्ता में वे किसी भी बहुराष्ट्रीय ब्रांड से कम नहीं।

युवा, छात्र, बर्ड वॉचर और फोटोग्राफर—करीब 2500 से ज्यादा लोग पहले ही दिन आयोजन से जुड़े।
मैराथन, पेंटिंग और क्विज प्रतियोगिताओं ने बच्चों को मोबाइल से निकालकर प्रकृति से जोड़ा।

trainees of birdwatching camp

कोटद्वार: पक्षियों का ठिकाना, पर्यटकों की नई मंज़िल

विधानसभा अध्यक्षा ऋतु खण्डूरी भूषण ने याद दिलाया कि

“उत्तराखण्ड की लगभग 700 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक केवल कोटद्वार क्षेत्र में पाई जाती हैं।”

उन्होंने 31 जनवरी को हर साल ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ घोषित करने का सुझाव देकर इस आयोजन को स्थायी पहचान देने की बात कही।

यह सिर्फ उत्सव नहीं, एक सोच है

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा कि यह फेस्टिवल हमें याद दिलाता है कि

“आज़ादी केवल इंसानों का अधिकार नहीं, पक्षियों और पूरी प्रकृति का भी उतना ही हक है।”

बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल ने साफ कर दिया कि कोटद्वार अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि प्रकृति-आधारित विकास मॉडल की ओर बढ़ता उत्तराखण्ड है—जहाँ सड़कें भी बनेंगी और पंख भी सुरक्षित रहेंगे।



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By udaen

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