देहरादून।
आज 10 जनवरी 2026 को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU), अंबेडकर युवक संघ, संत शिरोमणि गुरु रविदास सभा और भीम आर्मी के संयुक्त आह्वान पर करनपुर छात्रावास से डीएल चौक तक कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च अंकिता भंडारी हत्याकांड और सरधना (मेरठ) की घटना के विरोध में आयोजित किया गया। इस दौरान 11 जनवरी के प्रस्तावित बंद को सफल बनाने की जनता से अपील की गई।
कैंडल मार्च के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने एक स्वर में राजपुर विधायक और भाजपा अध्यक्ष के बयानों का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि दलित समाज बलात्कारियों और हत्यारों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा, चाहे आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
डीएल चौक पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिला सचिव लेखराज ने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा रोकने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए CBI जांच की संस्तुति महज एक कोरी घोषणा है, यह जांच किसी सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने 11 जनवरी के बंद को सफल बनाने की अपील की और बताया कि बस, ऑटो, ई-रिक्शा, ड्राइवर-कंडक्टर यूनियनें, सेलाकुई, राजा रोड और विकासनगर क्षेत्र की यूनियनें बंद का समर्थन कर रही हैं।
SFI के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा कि यदि CBI जांच होती है तो वह सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में हो, अन्यथा उसका कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने सबूत मिटाने के आरोप में बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की और राज्य में स्पा सेंटरों व रिजॉर्ट्स में चल रही कथित अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग रखी।
भीम आर्मी के उपाध्यक्ष एवं जिला रविदास सभा के अध्यक्ष उमेश कुमार ने कहा कि संगठन अंकिता भंडारी और मेरठ—दोनों घटनाओं का विरोध करता है तथा भाजपा पर बलात्कारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए बंद का समर्थन करता है।
भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के प्रदेश अध्यक्ष अमन उज्जैनिवाल ने कहा कि अंकिता हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे VIP का नाम सामने आने के बाद उसे बचाने की कोशिश करने वालों की कड़ी निंदा की जाएगी और समाज स्तर पर बहिष्कार किया जाएगा।
अखिल भारतीय अंबेडकर युवक संघ के अध्यक्ष दिलेराम रवि ने खजान दास और महेंद्र भट्ट द्वारा दलित नेता को बचाने के आरोपों की निंदा करते हुए बंद में शामिल होने की घोषणा की। अंबेडकर युवक संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं सीटू सदस्य बंटी सूर्यवंशी ने कहा कि जब वीडियो लीक में आरोपी का नाम स्पष्ट है तो सरकार उसे क्यों बचा रही है।
सीटू के जिला सचिव और डीएवी कॉलेज के पूर्व उपाध्यक्ष अभिषेक भंडारी ने भी सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच की मांग दोहराई। आशा वर्कर यूनियन की प्रांतीय महामंत्री लोकेश देवी ने कहा कि भाजपा शासन में महिलाएं ही नहीं, बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं और यूनियन अंतिम छोर तक न्याय की लड़ाई लड़ेगी।
कैंडल मार्च में SFI के प्रदेश सचिव शैलेंद्र परमार सहित बड़ी संख्या में छात्र, स्थानीय लोग और दलित समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सभा के अंत में 11 जनवरी के बंद को शांतिपूर्ण और व्यापक बनाने का संकल्प दोहराया गया।
