इतिहास के सिपाही और स्मृति का संघर्ष
इतिहास अक्सर वही लिखता है, जिसे सत्ता, समय या सुविधा स्वीकार कर ले। परंतु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो इतिहास को गुमनामी से निकालकर स्मृति में लौटाने का जोखिम उठाते हैं। ऐसी ही एक पुस्तक है—जो केवल अतीत का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि स्मृति और सम्मान की पुनर्प्रतिष्ठा है।
इसके लेखक ने 82 वर्ष की आयु में, स्वास्थ्य की सीमाओं के बावजूद, आठ वर्षों तक जिस निष्ठा और धैर्य के साथ यह शोध कार्य किया, वह आज के त्वरित लेखन और सतही इतिहास-बोध के दौर में असाधारण उदाहरण है। सैकड़ों पुस्तकों का अध्ययन, सरकारी अभिलेखों की छानबीन, सैनिक कल्याण बोर्डों से संवाद, पूर्व सैनिक परिवारों से मुलाक़ातें और दुर्गम पहाड़ी गाँवों की यात्राएँ—यह सब किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक भूले हुए इतिहास को न्याय दिलाने के लिए था।
गढ़वाली सैनिकों का योगदान केवल औपनिवेशिक सेनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के सामाजिक और वैचारिक धरातल पर भी उनकी भूमिका निर्णायक थी। दुर्भाग्यवश, इन योगदानों को न तो राष्ट्रीय इतिहास में पर्याप्त स्थान मिला और न ही स्थानीय स्मृति ने उन्हें सहेज कर रखा। यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक रिक्तता को भरने का प्रयास है।
विशेष रूप से कोटद्वार और आसपास के क्षेत्रों के अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का उल्लेख इस कृति को स्थानीय इतिहास से जोड़ देता है। यह याद दिलाता है कि आज जिन रास्तों, छावनियों और कस्बों को हम सामान्य मान लेते हैं, उनकी नींव संघर्ष, त्याग और साहस से रखी गई थी।
20 दिसंबर 2025 को में पुस्तक का विमोचन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह स्वीकारोक्ति थी कि इतिहास को सहेजने का कार्य भी राष्ट्र सेवा ही है।
आज जब इतिहास को सुविधा अनुसार मोड़ने और संक्षिप्त करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, तब ऐसी कृतियाँ हमें यह सोचने पर विवश करती हैं कि क्या हम अपने वास्तविक नायकों को भूलते जा रहे हैं। यह पुस्तक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि स्मरण और आत्ममंथन के लिए है।
समाज, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसी शोधपरक कृतियों को पाठ्यक्रम, पुस्तकालयों और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाए। क्योंकि जो समाज अपने गुमनाम सिपाहियों को याद नहीं रखता, वह भविष्य में अपने इतिहास की रक्षा भी नहीं कर सकता।
यदि आप चाहें, मैं इसे
- राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय अख़बार के अनुरूप छोटा,
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