Spread the love

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: पूर्व अनुमति के बिना CEC को भंग न करे केंद्र

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को गोदावर्मन आदेश का पालन करने का निर्देश

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षण मामलों में अदालत की सहायता कर रही केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के अस्तित्व और कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत सरकार न्यायालय की पूर्व मंजूरी के बिना सीईसी को भंग करने के किसी भी कदम पर आगे नहीं बढ़ सकती।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह निर्देश लंबे समय से चल रहे टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया।

सीईसी की भूमिका को बताया अनिवार्य

पीठ ने कहा कि भले ही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पर्यावरण मामलों में विशेषज्ञता के साथ कार्यरत है, लेकिन सीईसी सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में कार्य करने वाली संस्था है, जिसने पिछले 28 वर्षों से निरीक्षण, तथ्यात्मक मूल्यांकन और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के माध्यम से न्यायालय को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है।

अदालत ने टिप्पणी की कि सीईसी की स्वतंत्र तथ्य-जांच के बिना न्यायालय उन आदेशों को जारी नहीं कर सकता था, जो लगभग तीन दशकों से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संतुलन हेतु पारित किए जाते रहे हैं।

वैधानिक दर्जा मिलने के बाद और भी जरूरी हुआ ढांचा

पीठ ने ध्यान दिलाया कि 2023 की अधिसूचना के माध्यम से सीईसी को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत वैधानिक पहचान मिल चुकी है। ऐसे में समिति के निरंतर कामकाज पर किसी भी तरह का पुनर्विचार या समाप्ति केवल न्यायालय की अनुमति के बाद ही संभव है।

MoEF&CC को नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) को निर्देश दिया कि:

  • सीईसी के सचिव पद को किसी भी स्थिति में खाली न छोड़ा जाए,
  • और इसके लिए एक उपयुक्त अधिकारी की तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

कैबिनेट सचिवालय के सुझाव के बाद आया आदेश

यह निर्देश ऐसे समय आया है जब कैबिनेट सचिवालय ने एनजीटी की मौजूदगी के मद्देनज़र सीईसी के निरंतर कामकाज पर पुनर्विचार का सुझाव दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीईसी का अस्तित्व न्यायालय की निगरानी से सीधे जुड़ा है, इसलिए इसे भंग करने का कोई भी कदम अदालत की अनुमति के बिना स्वीकार्य नहीं होगा।



Spread the love

By udaen

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *