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उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात वर्ष 2019-20 से 13.23 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा

वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ी

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) के अंतर्गत प्रोत्साहन उन मामलों में स्वीकार्य हैं जहां योजना के अंतर्गत कवरेज के लिए आवेदित खाद्य उत्पादों के प्राथमिक प्रसंस्करण सहित विनिर्माण प्रक्रियाओं की पूरी श्रृंखला होती है। इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत आवेदकों के कृषि प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का कुल निर्यात वर्ष 2019-20 के संदर्भ में वर्ष 2024-25 तक 13.23 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ बढ़ा है। यह योजना उद्यान कृषि उत्पादन को सम्मिलित नहीं करती है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा देश में कार्यान्वित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना की विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत 170 आवेदकों की 278 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी दी गई है। जून 2025 तक प्रोत्साहन के रूप में कुल 1726.60 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। राज्यवार विवरण अनुलग्नक में दिया गया है ।

इस योजना से देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षमता में प्रति वर्ष 35 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से लगभग 3.39 लाख रोज़गार सृजित किए गए हैं। राज्यवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

अनुलग्नक

वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग

क्रमांकराज्यपीएलआईएसएफपीआई के अंतर्गत इकाइयों की संख्या
1आंध्र प्रदेश38
2असम4
3बिहार7
4छत्तीसगढ1
5गोवा1
6गुजरात32
7हरियाणा9
8हिमाचल प्रदेश4
9जम्मू और कश्मीर2
10झारखंड2
11कर्नाटक21
12केरल10
13मध्य प्रदेश10
14महाराष्ट्र41
15ओडिशा5
16पंजाब9
17राजस्थान6
18तमिलनाडु20
19तेलंगाना13
20उत्तर प्रदेश27
21उत्तराखंड7
22पश्चिम बंगाल9
 कुल278

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


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By udaen

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