रणजीत सिंह डिसले को मिला ग्लोबल टीचर अवार्ड, जीता 7 करोड़ रुपये का पुरस्कार
7 करोड़ का ग्लोबल टीचर प्राइज़ जीतने वाले रणजीत सिंह उप-विजेताओं के साथ बांटेंगे 50 फीसदी पैसा
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रंजीतसिंह डिसाले ने वैश्विक शिक्षक पुरस्कार को जीतने के साथ ही 1 मिलियन डॉलर का इनाम भी अपने नाम कर लिया है. वहीं अब पुरस्कार जीतने के बाद रंजीत सिंह डिसाले का कहना है कि वह अपने पुरस्कार राशी का 50 प्रतिशत भाग साथी टॉप 10 फाइनलिस्ट के साथ शेयर करेंगे.
रणजीत सिंह डिसले’ जिन्होंने की किताबों में क्यूआर कोड की पहल और जीता सर्वश्रेष्ठ टीचर का अवॉर्ड
सोलापुर के रणजीत सिंह डिसाले को इस वर्ष का ग्लोबल टीचर अवार्ड मिला है. यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय हैं. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने रणजीत सिंह को बधाई दी है.
महाराष्ट्र के सोलापुर के सरकारी स्कूल के शिक्षक रणजीत सिंह डिसले को ग्लोबल टीचर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लंदन में एक ऑनलाइन समारोह में उनके चुने जाने की घोषणा अभिनेता स्टीफन फ्राई ने की थी। पहली बार भारत के किसी शिक्षक को यह अवार्ड मिला है। यूनेस्को और लंदन के वार्की फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार में उन्हें 7 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। विश्व के 140 देशों से 12 हजार से अधिक शिक्षकों में से डिसले को चुना गया है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने रणजीत सिंह को बधाई दी है. डिसाले को लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और क्यूआर कोडेड किताबों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया है.
डिसले ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पहली बार किताबों में क्यूआर कोड शुरू करने की पहल की। उन्होंने हर पाठ और कविताओं का क्यूआर कोड बनाया है। इतना ही नहीं साल 2017 में महाराष्ट्र सरकार को ये प्रस्ताव दिया कि सारा सिलेबस इससे जोड़ दिया जाए। इसके बाद डिसले की ये बात पहले प्रायोगिक स्तर पर चली और तब जाकर राज्य सरकार ने घोषणा की कि वह सभी श्रेणियों के लिए राज्य में क्यूआर कोड पाठ्यपुस्तकें शुरू करेगी। अब तो एनसीईआरटी ने भी ये घोषणा कर दी है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल ने अपने बधाई संदेश में लिखा है कि मैं सोलापुर जिले के परितावाडी में ZP स्कूल के शिक्षक रणजीत सिंह डिसाले को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं, जिन्हें 1 मिलियन डॉलर के ग्लोबल टीचर प्राइज 2020 के लिए चुना गया है, जो कि लंदन द्वारा दिया जाता है. डिसाले ने ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के बीच शिक्षा के बारे में रुचि पैदा करने का काम किया है. नवीन विचारों और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से सराहनीय और दूसरों द्वारा अनुकरण करने योग्य है.
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के परितेवाड़ी गांव के एक 32 वर्षीय शिक्षक रंजीतसिंह डिसाले दुनिया भर के 140 देशों के 12,000 शिक्षकों के नामांकन से विजेता बने. 7 करोड़ की पुरस्कार राशि जीतने वाले डिसले ने घोषणा की कि कुल पुरस्कार राशि का पचास प्रतिशत 9 फाइनलिस्ट को दिया जाएगा, जो 9 देशों के हजारों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा.
सोलापुर के बुरी तरह से सूखाग्रस्त गांव में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल के टीचर डिसले को उनकी कोशिशों के कारण दुनिया के सबसे अद्भुत टीचर का अवॉर्ड मिला है। वार्की फाउंडेशन ने असाधारण शिक्षक को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत करने उद्देश्य से 2014 में यह पुरस्कार शुरू किया था, जिसके लिए इस साल दुनियाभर से 12000 हजार शिक्षकों की एंट्री आई थी। इनाम की राशि का एलान होते ही डिसले ने आधी राशि बाकी प्रतिभागी शिक्षकों में बांटने की घोषणा की है। वे कहते हैं कि शिक्षक हमेशा देने और बांटने में यकीन करते हैं, इनाम की आधी राशि बांटने पर हर एक रनर-अप के हिस्से 40 हजार पाउंड आएंगे।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, डिसाले ने कहा कि शिक्षक वास्तविक परिवर्तन करने वाले होते हैं जो अपने छात्रों के जीवन के चुनौतियों का समाधान करते हैं. वे हमेशा देने और साझा करने में विश्वास करते हैं. इसलिए, मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं अपने अविश्वसनीय काम का समर्थन करने के लिए अपने साथी शीर्ष 10 फाइनलिस्टों के बीच पुरस्कार राशि का 50 प्रतिशत समान रूप से साझा करूंगा. मेरा मानना है एक साथ, हम इस दुनिया को बदल सकते हैं क्योंकि साझाकरण बढ़ रहा है.
