बुनकरों को मार्केटिंग भी सिखा रहै है
टाटा ट्रस्ट बुनकरो जो तंगहाली में जीवन गुजार रहे परिवार के युवा है उनके लिए टाटा ट्रस्ट की योजना है।
क्लस्टरों की पहचान कर उसके ही आसपास आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रशिक्षण केंद्र खोल रहा है। इससे बुनकर परिवार के युवाओं को बुनाई के आधुनिक तरीके, डिजाइनिंग और विपणन से जुड़े गुर सिखाए जा सकेंगे।
टाटा समूह के परोपकारी संस्थान टाटा ट्रस्ट में क्राफ्ट विभाग की प्रमुख शारदा गौतम का कहना है कि बनारस, चंदेरी या कांचीपुरम जैसे बुनकर क्लस्टर को तो सब जानते हैं, इसलिए वहां के बुनकरों को काम मिलने में परेशानी नहीं होती है। लेकिन देश में इस समय सैकड़ों ऐसे क्लस्टर हैं, जो विलुप्त हो चुके हैं या होने की कगार पर हैं।
इनके बुने कपड़ों को बाजार नहीं मिल पाया, इसलिए इस समय वहां अंतिम पीढ़ी यह काम कर रही है। नई पीढ़ी यदि वहीं है तो कोई दूसरा काम करने लगी हैं या शहरों की ओर पलायन कर चुकी है। ऐसे परिवार के युवा फिर से अपने परंपरागत काम को अपनाने के साथ अपने घर में ही हर महीने 12-15 हजार रुपये कमा सकेंगे, इसी लक्ष्य को सामने रख कर टाटा ट्रस्ट ने यह बीड़ा उठाया है।
