World Health Organization यानी WHO ने चेताया है कि कोरोना से बाहर निकल रहे देश अगर पाबंदियों को संयमित और चरणबद्ध तरीके से नहीं हटाएंगे तो हालात खराब हो सकते हैं…
जेनेवा, रायटर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO) के प्रमुख ने बुधवार को कहा कि कोरोना महामारी से बाहर निकल रहे देश अगर पाबंदियों को संयमित और चरणबद्ध तरीके से नहीं हटाएंगे तो हालात खराब हो सकते हैं और दोबारा लॉकडाउन लागू करना पड़ सकता है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन को हटाने के लिए आवश्यक कई उपायों की एक सूची जारी की। इसमें हालात पर निगरानी बनाए रखने और स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से तैयार रखना शामिल है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक को संबोधित करते हुए घेब्रेयेसस ने कहा कि अगर पाबंदियों को सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से नहीं हटाया गया तो दोबारा लॉकडाउन लागू करने का खतरा पैदा हो जाएगा। महामारी के बारे में देर से चेतावनी जारी करने के आरोपों को लेकर आलोचना झेल रहे घेब्रेयेसस ने कहा कि उन्होंने हालात का आकलन किया है, लेकिन संकट के खत्म हो जाने के बाद ही वह इस बारे में कुछ कहेंगे।
घेब्रेयेसस ने कहा कि जब आग लगी हो तो हमारा ध्यान किसी अन्य बात की तरफ नहीं जाना चाहिए। गौरतलब है कि अमेरिका घेब्रेयेसस पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति से लेकर वहां के अन्य नेताओं ने डब्ल्यूएचओ को चीन केंद्रित होने के आरोप तक लगा चुके हैं।
डब्ल्यूएचओ के समर्थन में आया चीन
कोरोना वायरस को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना के बीच चीन के एक राजदूत ने डब्ल्यूएचओ का समर्थन किया है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों के कोरोना वायरस के पैदा होने की जांच करने के लिए वुहान का दौरा करने के मसले पर कहा कि इसके लिए महामारी के गुजर जाने तक इंतजार करना होगा। संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं के लिए चीन के राजदूत चेन शू ने कहा कि अभी सबसे पहली प्राथमिकता इस महामारी से लड़ने की है। हमें इसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अपने संसाधनों को लगाना चाहिए। ऐसा नहीं है कि हमें किसी भी तरह की जांच-पड़ताल या मूल्यांकन से परहेज है, बशर्ते कि वह अंतरराष्ट्रीय हित में हो।
