वैसे तो जब से धरती पर प्रकृति का निर्माण हुआ है उनमे सर्वश्रेष्ठ रचना मानव की है जिन्हें इस दुनिया को चलाने के लिए श्रम यानि कार्य करने की आवश्यकता पड़ती है और इसी श्रम शक्ति का समान करते हुए हमे उसके अधिकरों को अनदेखा नहीं कर सकते .
एक मई का दिन कामगारों के लिए खास दिन है क्योंकि इसी दिन उनको सबसे बड़ा अधिकार मिला। उनके लिए काम का घंटा तय हुआ। इससे पहले कामगारों का काफी शोषण होता था। कामगारों को यूं ही यह अधिकार नहीं मिल गया। मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर 1877 में आंदोलन शुरू किया, इस दौरान यह दुनिया के विभिन्न देशों में फैलने लगा। एक मई 1886 को पूरे अमेरिका के लाखों मज़दूरों ने एक साथ हड़ताल शुरू की। इसमें 11,000 फ़ैक्टरियों के कम से कम तीन लाख अस्सी हज़ार मज़दूर शामिल हुए और वहीं से एक मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।
मई दिवस य मजदूर दिवस को अलग अलग देशो में अलग अलग नामो से जाना जाता है कही पर श्रम दिवस तो कही पर श्रमिक दिवस तो कही पर मई दिवस तो कही पर Labour Day तो कही पर अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस के नाम से जाना जाता है.1 मई को ही महाराष्ट्र और गुजरात का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है। भारत की आजादी के समय यह दोनों राज्य बॉम्बे प्रदेश का हिस्सा थे। महाराष्ट्र में इस दिन को महाराष्ट्र दिवस, जबकि गुजरात में इसे गुजरात दिवस के नाम से भी जाना जाता है। भारत में एक मई का दिवस सब से पहले चेन्नई में 1 मई1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इस को मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इस की शुरूआत भारती मज़दूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। भारत में मद्रास के हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये। भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को मनाया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के तौर पर प्रामाणित हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में International Labour Organization (ILO) का गठन किया गया है जो पूरे विश्व के देशो के श्रमिको के हितो की रक्षा के लिए सदैव आगे रहता है और अन्तराष्ट्रीय मजदूर हितो की रक्षा करता है और इस दिन संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में अनेक प्रकार के विविध आयोजन भी किये जाते है और मजदूरों को अन्तराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित भी किया जाता है संयुक्त राष्ट्र बालश्रम पर भी निगरानी रखता है
वेश्वक महामारी से ग्रषित भारत और उसका मजदूर, किसान और कर्मचारी आखिर क्यूँ मनाये मई दिवस , महानगरों से गाँव और घर लोटता मजदूर ,बड़े तादात में बेरोजगार होते कर्मचारी और सरकार द्वारा काम करने के निश्चित समय को बढाने की पहल हमे चिंतित करती हे की