नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क।  World Malaria Day 2020: हर साल 25 अप्रैल को “विश्व मलेरिया दिवस” मनाया जाता है। इसे सबसे पहले 2008 में मनाया गया था। इस साल “विश्व मलेरिया दिवस” का थीम“Zero malaria starts with me” है। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने RBM से हाथ मिलाया है। मलेरिया मादा मच्छर एनोफिलीज के काटने से फैलता है। इन मच्छरों में प्लास्मोडियम पैरासाइट पाया जाता है जो आपके रक्त से होकर शरीर में फ़ैल जाता है। खासकर लीवर में पहुंचकर यह स्थायी हो जाता है। इसके बाद वह लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने लगता है।

मलेरिया चार तरह के पैरासाइट से फैलता है

इससे लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर के परजीवी कई गुना बढ़ जाते हैं, जिससे संक्रमित कोशिकाएं फट जाती हैं। पैरासाइट लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना जारी रखते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे लक्षण होते हैं जो एक समय में दो से तीन दिन तक रहते हैं। मलेरिया इन चार तरह के पैरासाइट से फैलता है-

1. प्लासमोडियम वाइवेक्स (P. vivax)

भारत में लगभग 60 प्रतिशत मलेरिया के मामले प्लासमोडियम वाइवेक्स की वजह से सामने आते हैं। इसमें शरीर में बुखार, जुकाम, थकान और डायरिया जैसी मुश्किलें सामने आती हैं।

2. प्लासमोडियम ओवाले (P.ovale)

यह पैरासाइट ज्यादातर पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाता है और यह इंसान को काटने के बाद भी काफी लंबे समय तक उसके शरीर में ज़िंदा बना रहता है।

3. प्लासमोडियम फेल्किपेरम (P. falciparum)

मलेरिया का यह पैरासाइट सबसे खतरनाक और जानलेवा होता है। इसमें उल्टी, बुखार, पीठ दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन, थकान लगना और पेट दर्द जैसे लक्षण होते हैं।

4. प्लासमोडियम मलेरिया (P. malaria)

इस पैरासाइट से पीड़ित मरीज में ठिठुरन के साथ तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि यह जानलेवा नहीं होता।