कोरोना वायरस के चलते लघु व्यवसाय को दिए गए 2.32 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पर डिफॉल्ट होने का सबसे ज्यादा खतरा है। साथ ही 10 लाख रुपये से कम के बकाया कर्ज पर भी बहुत संकट नजर आ रहा है।
कोरोना महामारी की वजह से 40 दिन तक चलने वाले लॉकडाउन से छोटे व्यवसायों के वित्तीय हालत को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।
ट्रांसयूनियन सिबिल ने अपने अध्ययन में
एजेंसी ने कहा कि ‘सीएमआर -7 से सीएमआर -10’ के उच्चतम जोखिम वाले ब्रैकेट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का 2.32 लाख करोड़ रुपये का बकाया है, इसके NPA हो जाने की सबसे अधिक आशंका है।
इसमें से अकेले 10 लाख रुपये से कम बकाया वाले उद्यमों के लिए कुल क्रेडिट 13,600 करोड़ रुपये है, जो सबसे अधिक जोखिम भरा है। छोटे व्यवसाय के लिए कुल एनपीए अनुपात पिछले कुछ वर्षों में बढ़ रहा है और दिसंबर 2019 तक यह 12.6 फीसद रहा है।
हा कि मौजूदा समय में 50 करोड़ रुपये से कम कर्ज वाले सभी व्यवसायों के लिए सभी फाइनेंसरों की कुल बकाया राशि 17.94 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बकाया कर्ज का 28 फीसद है।
ब्यूरो ने अपने वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए 10 लाख रुपये से कम बकाया वाले उद्यमों को शामिल करने के लिए एक उन्नत पद्धति शुरू की है। इसके प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने कहा, ‘COVID-19 महामारी व्यवसायों के लिए विशेष रूप से सूक्ष्म उद्यमों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है, जो अक्सर आर्थिक माहौल में अचानक बदलाव के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं।’
