इस बिल्ली को अब तक यूरोप और साइबेरिया में ही देखा गया है। इस बिल्ली का वजन करीब 30 किलोग्राम होता है। ये बिल्ली पहली बार भारत में दिखाई दी है। खास बात तो ये भी है कि ये बिल्ली उत्तराखंड में ही दिखाई दी है। सीसीटीवी में बिल्ली की तस्वीरें कैद हुई हैं। ये बिल्ली गंगोत्री नेशनल पार्क में दिखी है। वैज्ञानिक भाषा में इस बिल्ली का नाम ‘लिंक्स’ है। इस दुर्लभ जीव की तस्वीरें वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान की तरफ से नेलांग घाटी में लगाए गए कैमरों में कैद हुई हैं। WII के डॉक्टर एस. सत्या कुमार का कहना है कि ये बिल्ली उत्तराखंड में पहली बार दिखी है। खास बात ये है कि भारत में भी ये बिल्ली पहली बार दिखी है।
अब तक तिब्बत, साइबेरिया और यूरोप में ही इस जीव को देखा गया था। वैज्ञानिक बताते हैं कि ये बिल्ली विलुप्त होने की कगार पर है। यूरोप और साइबेरिया के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब ये बिल्ली ना के बराबर दिखती है। लेकिन उत्तराखंड में इस बिल्ली के दिखने से वैज्ञानिकों में एक बार फिर से खुशी की लहर है। लिंक्स की कई उप प्रजातियों में से यूरेशियाई लिंक्स आकार में सबसे बड़ी होती है। इस जंगली बिल्ली की लंबाई 80 से 130 सेंटीमीटर होती है। इसके साथ ही उसकी ऊंचाई 60 से 75 सेंटीमीटर होती है। इस बिल्ली क वजन 18 से 30 किलो के बीच होता है। इस बिल्ली का रंग स्लेटी और लाल रंग का होता है। इसके साथ ही इसकी खाल में काले चित्ते होते हैं। इससे पहले गंगोत्री नशनल पार्क में ही अरगली भेड़ दिखी थी। अरगली भेड़ भी विलुप्त होने की कगार पर है।
इसके बाद लिंक्स के मिलने से साबित होता है कि पार्क का पर्यावरण तंत्र वन्य जीवों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध करा रहा है। अपनी प्रजाति में ये जीव सबसे बड़े आकार का कहा जाता है। इसकी खास बात ये है कि इसकी पूंछ छोटी होती है। साथ ही इसके काम ऊंचे होते हैं। कानों के छोर पर बालों का गुच्छा होता है। इनके बड़े और गद्देदार पंजे बर्फ में चलने में मददगार साबित होते हैं। अकेले रहने वाली लिंक्स जंगलों में रहस्यमय जीवन बिताती है। खास बात ये है कि इस जीव को कैमरा ट्रैप और पंजों के निशान की मदद से ही ढूंढा जा सकता है। ये जीव हिरन और छोटे जीवों का शिकार करता है। हालांकि दुनियाभर में इस जीव का जमकर शिकार हुआ है। अवैध शिकार, रहने की जगहों और भोजन की कमी के चलते ये जीव विलुप्त होने की कगार पर है।
